Tuesday , April 7 2020
Home / धर्म/एस्ट्रोलॉजी/अध्यात्म / जानिए आखिर क्यों भोले पर चढ़ती है भांग, कहा से आयी यह परम्परा

जानिए आखिर क्यों भोले पर चढ़ती है भांग, कहा से आयी यह परम्परा

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था. महाशिवरात्रि के मौके पर भक्त भोले शंकर को प्रसन्न करने की पूरी कोशिश करते हैं. इसी हर्षोल्लास के बीच बाबा के प्रसाद के रूप में अधिकतर शिवभक्त भांग का सेवन करना नहीं भूलते हैं. परन्तु आपको जानकर हैरानी होगी कि भोले बाबा को भांग चढाने का जिक्र न तो शास्त्रों में है और न ही वेद-पुराणों में.

इसके साथ ही द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वोपरी बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद् के अध्यक्ष के मुताबिक शिव पूजा अराधना में भांग का कोई स्थान नहीं है. ये मात्र कुप्रथा है और विग्रह के लिए भी नुकसान दायक है.

वहीं इसके बावजूद सिर्फ वाराणसी के अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक शिवरात्रि के दौरान भांग की बिक्री 4-5 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. शिवरात्रि पर यहां भांग की दुकानों की बिक्री दोगुनी हो जाती है.

क्यों चढ़ाई जाती है शिव जी को भांग

इसके अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष अशोक द्विवेदी ने कहा कि भगवान काशी विश्वनाथ सहित देश के अन्य शिव मंदिरों में होने वाली पूजा में पंडों, पूजारियों और अन्य श्रद्धालुओं ने भांग चढ़ाने की जो परंपरा निभा रहे हैं, हम उन्हें कहना चाहते हैं कि हमारे वैदिक और पौराणिक कर्मकांडों में भी इसका कहीं उल्लेख नहीं हैं. वहीं शोष्डोपचार पूजा में अक्षत, दक्षिणा और भांग तक का प्रयोग नहीं है, परन्तु यत भक्षितम, तत निवेदितम, यानि किसी को खाने की आदत थी तो उसने शिवलिंग पर चढ़ाने की आदत लगा दी.

ठीक वैसे ही जैसे कामाख्या में बकरे की बलि होती है. जिसको जो खाने की आदत थी वे चढ़ाने की भी आदत बन गई. इसके साथ ही अशोक द्विवेदी का कहना है, ’35 वर्ष हो गए मुझे कर्मकांड में हजारों यज्ञ करा चुका हूं, परन्तु ये कहीं नहीं लिखा है कि इस मंत्र से भांग चढ़ेगा. ऋतु फल चढ़ाया जा सकता है, 

परन्तु भाग चढ़ाने का कहीं उल्लेख नहीं है. इसके अलावा  लोगों ने इसको लोकाचार बना डाला है.’विश्वनाथ मंदिर के ही पुजारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए अशोक द्विवेदी ने बताया कि मंदिर में पूजा के वक्त जो पुजारी भांग के आदी है वे भांग का गोला चढ़ा देते हैं. उसकी हम लोगों ने अनदेखी कि परन्तु फिर वही आगे चलकर 10 रूपए के गिलास में दूध, पानी, मंगरैल और भांग घोलकर बाबा विश्वनाथ पर हजारों-हजारों गिलास चढ़ने लगा और पंडों-पुजारियों ने इसे नहीं रोका.

इसके साथ ही वाराणसी के जिला आबकारी अधिकारी करूणेंद्र सिंह के अनुसार वाराणसी में शिवरात्रि पर्व के दौरान भाग की बिक्री 4-5 प्रतिशत तक बढ़ जाती है और वर्ष में बनारस की कुल भांग की खपत 48724 किलोग्राम है. वहीं भांग के दुकानदार रमेश ने बताया कि भांग औषधि है और ये काशी विश्वनाथ जी का प्रसाद है. इसके साथ ही इसकी बिक्री पूरे देश में सबसे ज्यादा वाराणसी में होती है. सबसे अधिक होली और शिवरात्रि पर भांग की बिक्री होती है.

TwitterFacebookLinkedInWhatsAppEmailTumblr
Loading...

Check Also

कोरोना से जंग में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बढाए मदद के हाथ, PM रिलीफ फंड में दिए इतने लाख

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सोमवार को कोरोना वायरस के संक्रमण से …

TwitterFacebookLinkedInWhatsAppEmailTumblr

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com