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दीपावली नहीं मनाते पृथ्वीराज चौहान के वंशज, जानें वजह

 

 

मीरजापुर। प्रकाश पर्व दीपावली पर जहां लोग घरों की सफाई कर लक्ष्मी पूजन के साथ दीपक से अपने घर को सजाते हैं वहीं राजगढ़ क्षेत्र में दर्जनों ऐसे गांव हैं जहां लोग दीपावली नहीं मनाते और दीपावली के दिन अपने घरों में बैठकर मातम मनाते हैं।

राजगढ़ ब्लाक के अटारी, कुंदरूप, बिशुनपुर, शक्तेशगढ, धुरकरख् लालपुर, तरंगा आदि ऐसे कई ग्राम हैं, यहां पर चौहान बिरादरी के लोग दीपावली नहीं मनाते। उनका कहना है की 16वीं शताब्दी में आज ही के दिन मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज की हत्या कर दी थी। इसी कारण अपने पूर्वज की याद में हम लोग दीपावली नहीं मनाते। अटारी गांव के राजगृही सिंह चौहान, गोरखनाथ चौहान, रामइकबाल चौहान, पूर्व प्रधान महेशसिंह चौहान, मटिहानी गांव के ज्वाला सिंह चौहान आदि लोगों ने बताया कि पृथ्वीराज चौहान विदेशी आक्रांता मोहम्मद गौरी को 16 बार युद्ध में परास्त किए थे। 17वीं बार युद्ध में पराजित हुए और दीपावली के दिन ही उनकी आंखें निकालकर उसमें नमक डाल दिया गया लेकिन पृथ्वीराज चौहान के कवि चंदबरदाई के इशारे पर अंधा होने के बाद भी शब्दभेदी बाण से उन्होंने मोहम्मद गोरी को मार डाला और स्वयं भी शहीद हो गए।

पृथ्वीराज चौहान का वंशज होने के नाते हम लोग दीपावली के दिन दीप उत्सव नहीं मनाते बल्कि देव दीपावली के दिन हम लोग अपने घरों को सजा कर उत्सव मनाते हैं। आजादी के बाद सन 1950 में बिहार के भोजपुर, आरा, सासाराम, धनबाद, गया, रोहतास आदि जिलों से आकर यहां पर बसे ये लोग अपनी परंपरा को कायम रखे हुए हैं। पूरे क्षेत्र में इनकी संख्या लगभग दस हजार है।

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