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अमन गुलाटी को राज्यपाल के दिए मूलमंत्र से मिली आगे बढऩे की प्रेरणा

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देव श्रीवास्तव/लखीमपुर-खीरी।

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    |केन्या में ग्लोबल सिख अवार्ड पाने के बाद वर्ल्ड रिकार्डर ने साझा की खुशी|

  • गुरु मंत्र और उत्साहवर्धन के बगैर किसी का कुछ भी पाना संभव नहीं। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे पर वाहे गुरु की कृपा रही और प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक से आगे बढऩे के गुरु मंत्र मिले। जिले की मीडिया और लोगों ने कदम-कदम पर मेरा उत्साहवर्धन किया। जिसके बदौलत मुझे इतना बड़ा सम्मान मिलने का गौरव प्राप्त हुआ। यह बात वर्ल्ड रिकार्डर अमन गुलाटी ने दक्षिण अफ्रीकी देश केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित विशेष कार्यक्रम में ग्लोबल सिख अवार्ड से सम्मान पाने के बाद लखीमपुर पहुंचने के बाद कही।
  •  महज 16 साल की उम्र में पांच विश्व रिकार्डों के जरिए आर्ट के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले लखीमपुर के रहने वाले अमन सिंह गुलाटी ने कहा कि केन्याई राष्ट्रपति के मुख्य आतिथ्य में कार्यक्रम आयोजित हुआ था। उन्होंने कहा कि सम्मान पाने के बाद देश के लिए कुछ कमाने का गौरव मिला। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता व शुभचिंतकों को दिया। इसके अलावा विशेष तौर पर उन्होंने महामहिम राज्यपाल रामनाईक का शुक्रिया अदा किया। अमन ने कहा कि राज्यपाल ने भेंटवार्ता के बाद उन्हें चार मूल मंत्र दिए थे जिसका पालन करने के बाद वह इस मुकाम पर पहुंच सके। गौरतलब रहे कि वर्ष 2017 में अमन ने देश के जवानों को समर्पित विश्व की सबसे लम्बी राखी बनाई थी। जिसके लिए न केवल यूनिक वर्ल्ड रिकार्ड ने उन्हें सम्मानित किया था बल्कि गिनीज बुक आफ रिकार्ड में भी यह कीर्तिमान दर्ज होने की प्रक्रिया में है।
  • अपने इस विश्व रिकार्ड  गुरु गोविंद सिंह साहिब के प्रकाश पर्व पर अमन ने कई दिन और कई रातें जागकर करीब ढाई मंजिला पजल पोट्रेट पेंटिंग तैयार की। इसे भी वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया। इस बीच अमन ने एक ऐसा कारनामा भी कर दिखाया जिसे करने के लिए दुनियां के कलाकारों को सूक्ष्मदर्शी जैसे संयंत्रों का प्रयोग करना पड़ता है। अमन ने नाखून के बराबर भगत सिंह की विश्व की सबसे छोटी पोट्रेट पेंटिंग बनाई। वह भी बिना किसी सूक्ष्मदर्शी जैसे यंत्र की मदद के। यह भी भारत के महान क्रांतिकारी को दी गई विश्व की सबसे बड़ी श्रद्धांजलि थी। 
  • आर्ट की दुनियां में अमन कुछ नया करने की कोशिश में थे। उनकी यह कोशिश कोल पेंटिंग पर आकर ठहरी। जिस कोयल को इस्तेमाल लोग भ-ियों में करते हैं उसका प्रयोग उन्होंने पेंंिटंग बनाने में किया। अमन ने कई पेंटिंग तैयार कीं। साथ ही अपने ष्अमन आर्टष् नामक संस्था में सैकड़ों बच्चों को निरूशुल्क रूप से इस पेंटिंग को सिखाकर उन्हें विश्व पटल पर लाने का भी प्रयास कर रहे हैं। 
  • अमन सिंह ने उप्र के राज्यपाल डा. रामनाईक की पुस्तक ‘चरैवेति-चरैवेति’ का मुख पृष्ठ फ्रंट पेज तैयार किया। यह मुख पृष्ठ दुनियां की किसी भी किताब के सबसे बड़े मुख पृष्ठ के रिकार्ड में शामिल हुआ। इसके लिए राज्यपाल ने भी अमन को सम्मानित किया था। 2 अक्टूबर को अमन ने गांधी जी की एक अलग ही पेंटिंग बनाई। यह पेंटिंग देशभर में तो सराही ही गई साथ ही इसके लिए अमन को केन्या की राजधानी में श्ग्लोबल सिख अवार्ड्य से भी सम्मानित किया गया है। अमन अपनी हर पेंटिंग को देश के लोगों को समर्पित करते हैं।
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