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ब्लैक लिस्ट होने की कगार पर पाकिस्तान, इन देशों से लगा रहा गुहार

नई दिल्लीः आतंकवाद को अपनी राष्ट्रीय नीति बना चुके पाकिस्तान के लिए अब अपना गला बचाना मुश्किल हो रहा है। पाकिस्तान और इमरान खान के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद ही चिंताजनक होने वाले हैं। पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट होने का डर सता रहा है। वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) प्लेनरी और वर्किंग ग्रुप की बैठक सोमवार से शुरू हो रही है।

बैठक में यह फैसला होना है कि क्या पाकिस्तान ने मनी-लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को लेकर के अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कदम उठाया है कि नहीं। ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए पाकिस्तान सदस्य देशों तक पहुंचकर रो चुका है। उसका कहना है कि इससे उसकी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचेगी, लेकिन अमेरिका और यूरोप के राजनयिकों के अनुसार ऐसा कुछ नहीं होने वाला है।

बता दें कि एफएटीएफ ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा था और एक साल की अवधि में उसे इससे निकलने के लिए आतंक के खिलाफ 27-पॉइंट एक्शन प्लान को लागू करने के निर्देश दिए थे। इसमें बैंकिंग और गैर-बैंकिंग क्षेत्राधिकार, पूंजी बाजार, कॉर्पोरेट और गैर-कॉर्पोरेट क्षेत्रों जैसे चार्टर्ड अकाउंटेंसी, वित्तीय सलाहकार सेवाओं, लागत और प्रबंधन लेखा फर्म के माध्यम से प्रतिबंधित संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं, आभूषण और इसी तरह की संबंधित सेवाएं द्वारा मनी-लॉन्ड्रिंग और आतंक-वित्तपोषण के खिलाफ सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के प्रतिभूति और विनिमय आयोग द्वारा तैयार एक अनुपालन रिपोर्ट की जांच पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के विभाग के मंत्री हम्माद अजहर की मौजूदगी में की जाएगी। एफएटीएफ के अनुसार, यदि पाकिस्तान 27-पॉइंट एक्शन प्लान को लागू करने में विफल रहता है, तो देश को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। अगस्त 2019 में, एशिया पैसिफिक जॉइंट ग्रुप ने अपने मानकों को पूरा करने में विफल होने पर पाकिस्तान को एन्हांस्ड फॉलोअप सूची में डाल दिया था।

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