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सीएमओ के निलंबन पर अड़े निर्भया के दादा, धरना-प्रदर्शन जारी

 

 

बलिया। निर्भया के गुनाहगार फांसी की सजा को अपनी पैंतरेबाजी से जहां दिल्ली में उलझाए हुए हैं, वहीं निर्भया के गांव में सरकारी अस्पताल पर चिकित्सक व अन्य सुविधाओं की कमी को लेकर आंदोलन जारी है। खास तौर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के निर्भया के विरुद्ध की गई बेतुकी टिप्पणी से परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हैं और सीएमओ को निलंबित करने की मांग को लेकर उनका धरना शुक्रवार को भी जारी रहा।

16 दिसम्बर 2012 को दिल्ली में निर्भया के साथ दरिंदगी के बाद उसके पैतृक गांव में नया प्राथमिक चिकित्सालय की सुविधा की घोषणा की गयी। इसके बाद अस्पताल तो चालू हो गया पर चिकित्सक रोजाना उपलब्ध नहीं रहते। साथ ही गांव में बिजली-पेयजल की सुविधा को लेकर भी ग्रामीण आक्रोशित हैं। अस्पताल के गेट पर जारी धरना में उनकी मांग है कि गांव में बने सरकारी अस्पताल का नाम निर्भया के नाम पर रखा जाय। रोजाना चिकित्सक उपलब्ध रहे। गांव में बिजली और पेयजल की समुचित व्यवस्था हो।

इन्ही मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान सीएमओ डॉ. पीके मिश्र के बेतुके बोल संबंधित वीडियो वायरल हो गये। जिसमें वह यह कहते हुए नजर आये कि ‘निर्भया के गांव में किसी ने डॉक्टरी की पढ़ाई नहीं की और यहां डॉक्टर चाहिए। निर्भया दिल्ली पढ़ने क्यों गई ? पहले डॉक्टर की पढ़ाई करें फिर इसमें डॉक्टर बन जाएं।’ इसे लेकर निर्भया के दादा भी खासे नाराज हो गए थे।

हालांकि सीएमओ द्वारा माफी भी मांगी गई, लेकिन इससे भी निर्भया के दादा का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। उनका कहना है कि सीएमओ उच्च पदस्थ होते हुए भी नारी गरिमा के सम्मान को ठेस पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने शुक्रवार को एक बार फिर कहा कि यदि सप्ताह भर के अंदर सीएमओ को निलंबित नहीं किया गया तो वे इसी अस्पताल के गेट पर आत्मदाह करने को बाध्य होंगे। वह अपनी बात पर अभी भी कायम हैं। उन्होंने कहा कि सीएमओ के निलंबन से कम कुछ भी उन्हें स्वीकार नहीं होगा।

उधर, सीएमओ के कथित बेतुके बोल को लेकर जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने जांच के आदेश दिए हैं। वहीं निर्भया के गांव न्यू पीएचसी पर एक डॉक्टर व एक चौकीदार की तैनाती के आदेश भी दे दिए गए हैं। हालांकि इससे भी ग्रामीणों का गुस्सा कम नहीं हुआ है और वह धरना स्थल पर डटे हुए हैं।

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