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जयंती विशेष- देश में फैली कुरीतियों को खत्म कर नया समाज बनाने मे लगे थे जयप्रकाश नारायण

लोकनायक मसहूर भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता के साथ ही मजदूरों और कर्मचारियों के हक की लड़ाई लड़ने वाले समाज में सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, नैतिक हर प्रकार का परिवर्तन लाके देश में एक नया समाज बनाने की उम्मीद रखने वाले जयप्रकाश नारायण की जयंती हैं आज पूरे देश भर में मनाया जा रहा है l

*जीवन परिचय*

जयप्रकाश नारायण का जन्म आज के ही दिन 11 अक्टूबर 1902 को बिहार में हुवा था l इनके पिता का नाम देवकी बाबू था l 9 वर्ष के उम्र में उन्होंने पटना के कॉलेजिएट स्कूल की 7वीं कक्षा में दाखिला लेने के लिए अपना गाँव छोड़ दिया। विद्यापीठ में पाठ्यक्रम समाप्त करने के बाद, जयप्रकाश ने संयुक्त राज्य में पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया

*जवाहरलाल नेहरू के निमंत्रण पर कांग्रेस में हुए शामिल*-

जयप्रकाश नारायण अमेरिका से मार्क्सवादी के रूप में भारत लौटे। इसके बाद 1929 में जवाहरलाल नेहरू के निमंत्रण पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए इस दौरान गांधी कांग्रेस में उनके गुरु बने। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें विशेष प्रसिद्धि मिली l

इंदिरा गांधी के खिलाफ चलाया आंदोलन-

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी को चुनावी कानूनों के उल्लंघन का दोषी पाया था । नारायण ने इंदिरा और मुख्यमंत्रियों से इस्तीफा देने और सेना और पुलिस को असंवैधानिक और अनैतिक आदेशों की अवहेलना करने का आह्वान किया। उन्होंने सामाजिक परिवर्तन के एक कार्यक्रम की वकालत की, जिसे उन्होंने संपूर्ण क्रांति , “कुल क्रांति” कहा। इसके तुरंत बाद, गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की ।

इंदिरा गांधी के खिलाफ रामलीला मैदान में रामधारी सिंह दिनकर की कविता का किया पाठ-

जयप्रकाश नारायण ने रामलीला मैदान में 100,000 लोगों की एक सभा को आकर्षित किया और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की अद्भुत उत्तेजक कविता सिंघासन खाली करो के जनता आती है का पाठ किया ।

एआइआरएफ के अध्यक्ष चुने गए थे जयप्रकाश नारायण

वर्ष 1952 में गोरखपुर में एआइआरएफ का वार्षिक अधिवेशन हुआ। फेडरेशन के अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ कांग्रेसी हुमायूं कबीर का नाम प्रस्तावित था जिनके खिलाफ प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में रहे जयप्रकाश नारायण ने दावेदारी की और एआइआरएफ के अध्यक्ष चुने गए l

यूनियन और रेल बोर्ड की वार्ता के लिए जयप्रकाश नारायण ने शुरू किया था आंदोलन-

अध्यक्ष बनने के बाद जय प्रकाश ने न सिर्फ देशभर के रेलकर्मियों को एक किया बल्कि सरकार के खिलाफ खड़े भी हुए। 1970 में रेल रोको देश व्यापी रेल रोको आंदोलन चलाकर रेलवे बोर्ड को मजबूर कर दिया कि वह मान्यता प्राप्त रेलवे यूनियन से वार्ता करे। जिसके बाद रेलवे बोर्ड को वापिस पीछे आकर यूनियनों के मांगो पर वार्ता करना पड़ा l

गांधी के विचारों से प्रभावित हुए थे जयप्रकाश-

अमेरिका में अध्ययन के दौरान जेपी पर कार्ल मार्क्‍स और उनके समाजवाद का बहुत प्रभाव पड़ा। वे उन दिनों रूसी क्रांति से भी बहुत प्रभावित हुए। वर्ष 1929 में भारत आने पर जेपी पूरी तरह से मार्क्‍सवादी हो चुके थे। वे सशस्त्र क्रांति के जरिए अंग्रेजी सत्ता को भारत से बेदखल करना चाहते थे, हालांकि महात्मा गांधी और नेहरू से मिलने एवं आजादी की लड़ाई में भाग लेने के बाद उनकी विचारधारा में भी बदलाव आया। वे कांग्रेस में शामिल होकर महात्मा गांधी के साथ रहे।

मुजफ्फरपुर में नक्सलियों के खिलाफ लड़ी थी लड़ाई-

साल 1970 में जयप्रकाश नारायण ने मुजफ्फरपुर में नक्सलियों के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी थी। दर्शल मुशहरी को केंद्र बने करीब 10 महीने हुए थे। कि इसी बीच उन्हें मारने की धमकी नक्सलियों से मिली लेकिन इसके बावजूद जमे रहे और ग्रामीण विकास की धार से उनके विस्तार को कमजोर करते रहे। उन्होंने घोषणा की कि मुशहरी से नक्सलवाद समाप्त होगा या यहीं मेरी हड्डी गिरेगी।

मरणोपरांत भारत रत्न से हुए सम्मानित-

जयप्रकाश नारायण की मृत्यु 8 अक्टूबर 1979 को पटना बिहार में मधुमेह और हृदय रोग के प्रभाव के कारण हो गई l भारत सरकार द्वारा साल 1998 में उन्हें मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मनित किया गया था.