क्या ये हैं अच्छे दिन ? साहब के संरक्षण में खुलेआम वसूली करते हैं मितौली थाने के सिपाही ..

लखीमपुर खीरी। भयमुक्त समाज की स्थापना के लिए बनी पुलिस रिश्वतखोर पुलिस बनती जा रही है। यह हाल है जनपद खीरी की मितौली थाना पुलिस का। यहां तैनात सिपाही थाने के अंदर व बाहर खुलेआम रिश्वतखोरी कर रहे हैं और थाने दार इनका बचाव।

मितौली थाने में एक नया मामला फिर सामने आया जब जानवरों से भरी ट्राली से सुविधा शुल्क वसूल रहा वर्दीधारी सिपाही कैमरे में कैद हो गया। हालांकि इस मामले में भी मितौली एसओ सिपाहियों का बचाव करते दिख रहे हैं।

चेकिंग के दौरान पुलिस करती है जम कर वसूली 

आपको बता दें की मितौली थाना इन दिनों अपनी रिश्वतखोरी के लिए अखबारों की सुर्खियां बना हुआ है। सिपाहियों में रिश्वतखोरी का हुनर इस कदर है कि सिपाही हर मामले को मैनेज कर लेते हैं। वाहन चेकिंग के दौरान जमकर वसूली होती है। दिन रात थाने के सामने से निकलने वाले वाहनों से भी वसूली की जाती है। इन सबके विपरीत थाने के एसओ हर मामले में सिर्फ सिपाहियों का बचाव करते दिखते हैं। एसओ साहब द्वारा अभी तक किसी भी मामले में किसी भी सिपाही के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या यह सब गोरखधंधा एसओ साहब की देख रेख में चल रहा है। हालत इतनी खराब है कि थाने के सामने जानवरों से भरी ट्राली से भी संतोष नामक एक सिपाही खुलेआम वसूली करता कैमरे में कैद हो गया।

इसके बावजूद एसओ महोदय पत्रकारों पर मामले का दोष मरते हुए नजर आए। मितौली थाने का यह एक मामला नहीं? अब तक ऐसे दर्जनों मामले प्रकाश में आ चुके हैं जिसमें थाने में तैनात सिपाही खुलेआम रिश्वतखोरी और सुविधा शुल्क लेते हुए नजर आए हैं। अभी हाल ही में एक मामले में थाने के सिपाही द्वारा एसएसबी सिपाही से बदसलूकी का मामला सामने आया। इसी मामले में पैसे के लेनदेन को लेकर सिपाही ने पत्रकार से भी अभद्रता का डाली। इसके बावजूद यह सिपाही एसओ साहब के संरक्षण में थाने में तैनात हैं। इन सब घटनाओं के बावजूद खीरी पुलिस के मुखिया न जाने क्यों अपनी आंखों को मूंदे पड़े हुए हैं। मामला संज्ञान में आने के बावजूद SP खीरी द्वारा अभी तक किसी भी मामले में कोई कठोर कार्रवाई न किए जाने से आम लोगों में यह सवाल चल रहा है कि क्या थाने की वसूली का हिस्सा महकमे के बड़े अधिकारियों तक भी जा रहा है।

कुल मिलाकर पुलिस कि यह कार्यशैली योगी सरकार की नीतियों के विरुद्ध है। ऐसे में सरकार की मनसा पूरी होने वाली नहीं। जिस तरह से पुलिस महकमे के आला अधिकारी पुलिस को जनता का मित्र बनाना चाहते हैं और तरह तरह की योजनाएं चलाकर पुलिस और जनता के बीच सामंजस्य बैठाने की कोशिश कर रहे हैं। यह कोशिशें मितौली थाने की कार्यशैली को देखते हुए तो लगता है कि सार्थक होने वाली नहीं हैं।

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