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उत्तराखंड का ऐसा गांव, जहां बारिश होते ही सताने लगता है मौत का डर

हमारे देश में लोग बेसब्री से मानसून का इंतजार करते हैं, लेकिन उत्तराखंड में कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां हल्की सी बरसात गांव वालों की रूह कंपा देती है. जब भी यहां बारिश होती है, गांव वाले रातभर जागने को मजबूर हो जाते हैं. कुछ ऐसा ही हाल है रुद्रप्रयाग के छांतीखाल गांव का. इस गांव के लोगों का विस्थापन होना था, लेकिन प्रशासन ने कुछ लोगों का विस्थापन किया और कुछ को यहीं छोड़ दिया.

गांव लगातार धंसता जा रहा है

बताया जा रहा है कि, छांतीखाल गांव के ठीक नीचे बदरीनाथ हाई-वे पर नासूर बन चुकी सिरोहबगड़ की डेंजर पहाड़ी है, जो आये दिन बारिश होते ही दरकती रहती है. जिसके चलते कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं. हाई-वे पर आ रहे मलबे के कारण छांतीखाल गांव पिछले कई सालों से लगातार नीचे धंसता जा रहा है.

प्रशासन ने कुछ का किया विस्थापन

खतरे को देखते हुये शासन ने छांतीखाल गांव के विस्थापन की बात की थी. जिसके बाद कुछ परिवारों का विस्थापन तो कर दिया गया था, लेकिन आज भी कुछ का विस्थापन नहीं हो पाया है, जो मौत के साए में जी रहे हैं.

जिलाधिकार का कहना है कि

बता दें, छांतीखाल गांव स्लाइडिंग जोन सिरोहबगड़ के ठीक ऊपर है, जहां हमेशा पहाड़ी खिसकती रहती है, जिस कारण पत्थर लगातार गिरते रहते हैं. ये स्लाइडिंग जोन ऋषिकेश-बदरीनाथ मोटर मार्ग- 58 पर है, जो ज्यादातर बंद ही रहता है.वहीं जिलाधिकारी का कहना है कि शासन से बजट आ गया है और विस्थापित परिवारों को पैसा दिया गया है. और विस्थापित परिवार अपने घर बना रहे हैं. लेकिन ये बात सच नहीं है.  अगर शासन से पैंसा मिला होता तो रुद्रप्रयाग जनपद में 22 गांवो के 471 परिवार आज भी सरकार की ओर टक टकी लगाये नहीं रहते कि कब हमारा गांव या परिवारों  का विस्थापन होगा.

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