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उप्र : कानून बनाने के बाद मेरठ में तीन तलाक के 18 मुकदमे हुए दर्ज

 

 

मेरठ। केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने के बाद से तीन तलाक के मुकदमे तेजी से दर्ज हो रहे हैं। सबसे ज्यादा 18 मामले मेरठ जनपद में दर्ज हुए हैं, जिनमें से दो लोगों को पुलिस ने जेल भेजा है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को प्रतिबंधित करने के बाद केंद्र सरकार ने तीन तलाक कानून बनाने के प्रयास किए। पिछली एनडीए सरकार में संसद से तीन तलाक बिल पास नहीं होने के बाद तीन बार केंद्र सरकार ने अध्यादेश जारी किया। अब वर्तमान एनडीए सरकार ने तीन तलाक कानून संसद से पास कराकर उसे दंडनीय अपराध बना दिया। इसके बाद से तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है और पुलिस थानों में मुकदमे दर्ज हो रहे हैं।

 

मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि तीन तलाक के सबसे ज्यादा मामले दर्ज होने में मेरठ अव्वल है। कानून बनने के बाद मेरठ जनपद में तीन तलाक के अब तक 18 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इनमें से सबसे ज्यादा आठ मुकदमे लिसाड़ी गेट थाने में सामने आए। इनमें से दो मामलों में आरोपितों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है। जबकि दस मामले में अन्य थानों में दर्ज हुए हैं।

गौरतलब है कि लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र मुस्लिम आबादी बाहुल्य है। इसी कारण यहां पर तीप तलाक के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। एसएसपी का कहना है कि तीन तलाक की शिकायत आते ही मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। मुस्लिम महिलाओं में जागरूकता के कारण अब वह तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठा रही हैं।

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