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यू.पी. विधानसभा उपचुनाव: यूपी के दोनों डिप्टी सीएम को मिली बड़ी जिम्मेदारी

यू.पी. विधानसभा उपचुनाव: यूपी के दोनों डिप्टी सीएम को मिली बड़ी जिम्मेदारी
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विधानसभा उपचुनावों को लेकर, सरकार और संगठन की ओर से रणनीति बनाकर किला फतेह करने की कोशिश होने लगी है। वहीं दूसरी तरफ, जमीनी नब्ज टटोलने के लिए प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और सरकार के दोनों उप मुख्यमंत्री खुद मैदान पर उतरे हैं।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव ने कानपुर में कार्यकर्ताओं से मिलकर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की व इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर जमकर हमला भी बोला। इसके बाद वह देवरिया दौरे पर रहेंगे। वहां पर पूर्व विधायक जनमेजय सिंह के निधन के कारण उपचुनाव होने हैं। इन बैठकों में वह चुनावी तैयारियों के साथ विपक्ष की ताकत की थाह लेने में जुटे हैं।

दोनों उपमुख्यमंत्रियों के कन्धों पर चुनाव जीताने का पूरा दारोमदार

उधर, सरकार की ओर से दोनों उपमुख्यमंत्रियों को भी चुनाव जीताने की जिम्मेंदारी सौंपी गयी है। इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कानपुर की घाटमपुर विधानसभा पहुंचे। इतना ही नहीं उन्होंने इस दौरान 272 करोड़ की लागत से 212 किमी लम्बी सड़कों और 71 परियोजनाओं का शिलान्यास किया।

चुनावी शंखनाद करते हुये वे बोले कि 2020 के उपचुनाव को लेकर तैयार रहें और बीजेपी को वोट देकर कमलारानी जी को सच्ची श्रद्घांजलि दें। इस दौरान उन्होंने आनूपुर मोड़ से परास चौराहा मार्ग का नाम कमलरानी के नाम से करने की घोषणा भी की। इसके अलावा अब उनका दौरा रामपुर, बुलंदशहर, अमरोहा और फिरोजाबाद का है।

जिन 8 सीटों पर होने हैं उपचुनाव, उनमें से 6 सीटें बीजेपी के कोटे में

उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने भी उन्नाव की बांगरमऊ की सीट से सारे समीकरण दुरूस्त करने शुरू कर दिये हैं। इसके बाद वह टुंडला जाएंगे। इन सभी के साथ संगठन के लोग भी वहां पर पहले से मौजूद रहते हैं, जो जमीनी फीडबैक देते हैं।

बीजेपी के प्रदेश मंत्री चन्द्रमोहन ने कहा कि, “बीजेपी हर चुनाव को लेकर संजीदा रहती है। हमारी पार्टी ने पूरी तैयारी कर रखी है। बीजेपी सरकार की बहुत सारी उपलब्धियां हैं, इस कारण जनता बीजेपी के प्रत्याशियों को निश्चित तौर पर विजयी बनाएगी।”

राजनीतिक विशेषज्ञ व स्वयं संगठन, इन चुनावों को मान रहा प्रतिष्ठा का विषय

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिन 8 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से 6 सीटें बीजेपी के पास थीं। बीजेपी सत्तारूढ़ दल है, ऐसे में उसके लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का विषय है। बीजेपी चाहेगी कि 8 सीटें न जीत पाए तो कम से कम 6 सीटों पर जीत बरकरार रखे।

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