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कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए आवश्यकतानुसार ट्रेड विकसित किये जाएं : मुख्यमंत्री

 

 

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को यहां कहा कि व्यावसायिक एवं कौशल विकास सम्बन्धी प्रशिक्षण हेतु वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार ट्रेड विकसित किये जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में कजान, रूस में आयोजित हो रही विश्व कौशल प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश का भी प्रतिनिधिमण्डल भाग लेगा।

मुख्यमंत्री आज लोक भवन में केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री डाॅ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय के साथ कौशल विकास के सम्बन्ध में समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए आवश्यकतानुसार ट्रेड विकसित करने से प्रशिक्षित युवाओं को बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ‘हर घर नल’ योजना का शुभारम्भ करने जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहन वर्तमान की आवश्यकता है। इन नई जरूरतों के दृष्टिगत व्यावसायिक एवं कौशल विकास ट्रेड विकसित कर युवाओं को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

योगी ने केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री को राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास मिशन के कार्याें में हर सम्भव सहयोग के आश्वासन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रम को आगे बढ़ायेगी।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के अधिकारियों के अनुरोध पर अगस्त के अंतिम सप्ताह में कजान, रूस में आयोजित हो रही विश्व कौशल प्रतियोगिता में राज्य का प्रतिनिधिमण्डल भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा कानपुर में स्थापित किये जा रहे ‘इण्डियन इंस्टीट्यूट आफ स्किल’ के कार्याें में तेजी लाने के लिए हर सम्भव सहयोग के भी निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये।

समीक्षा के दौरान केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री डाॅ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास के कार्याें को कन्वर्जेंस के माध्यम से आगे बढ़ाने की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार के इस माॅडल को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय राज्य सरकार के सहयोग के लिए सदैव तत्पर है।

इस अवसर पर कौशल विकास सचिव भुवनेश कुमार ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से अवगत कराया कि प्रदेश के युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण आईटीआई तथा उप्र कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) के तहत दिया जाता है। वर्तमान में प्रदेश में 305 राजकीय आईटीआई तथा 2867 निजी आईटीआई संचालित हैं। वर्ष 2013-14 में राज्य में 217 राजकीय आईटीआई थे और इनकी प्रशिक्षण क्षमता 53088 सीटों की थी। वहीं वर्ष 2019-20 में राजकीय आईटीआई की संख्या बढ़कर 307 तथा प्रशिक्षण क्षमता बढ़कर 1,69,864 सीटों की हो गयी है।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा व्यवसायों हेतु पूर्व में लागू सुपर-न्यूमरेरी व्यवस्था को समाप्त कर व्यवसायों के एककों में सीटों की संख्या को स्थिर कर दिया गया है, जिसके कारण प्रशिक्षण क्षमता में 33,116 सीटों की वृद्धि हो गयी है। इन बढ़ी सीटों से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग हेतु अनुमन्य 10 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था को प्रदेश के राजकीय आईटीआई में लागू कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 व 2018-19 में स्वीकृत किये गये 39 नये राजकीय आईटीआई वर्तमान में निर्माणाधीन हैं। इनके क्रियाशील होने से 20,592 प्रशिक्षण सीटों की वृद्धि हो जाएगी। प्रदेश की असेवित तहसीलों व विकास खण्डों एवं विधानसभा क्षेत्रों में 123 नये राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को स्थापित किया गया है। प्रवेश प्रक्रिया को युक्तिसंगत बनाते हुए ब्लाॅकवार, तहसीलवार व जिलेवार आरक्षण को लागू करते हुए उसे जनोपयोगी बनाया गया है।

कौशल विकास सचिव ने कहा कि भारत सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गयी वित्तीय सहायता के माध्यम से प्रदेश के 203 राजकीय आईटीआई में बाॅयोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली स्थापित की गयी है।

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