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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी:कैसे करें पूजन साथ ही जानें बीमारियों से बचने के अचूक उपाय

भगवान विष्णु के आठवें अवतार वसुदेव श्री कृष्ण ,द्वारिकाधीश,कन्हैया  इत्यादि नामों  से जाने जाने वाले  के जन्म को पूरी दुनिया “श्री कृष्ण जन्माष्टमी” के रूप मे मनाती  है। पुराने समय मे प्रत्येक वर्ष  भादों मास आते ही घर घर मे भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिन की तैयारियां  बड़े हर्षोल्लास से प्रारम्भ हो जाती थीं । बाज़ार विभिन्न प्रकार के मिठाइयों खिलौनों इत्यादि से सज जाते थे । ऐसा लगता था की मानो हमारे घरों मे ही कान्हा  ने जन्म लिया हो । मंदिरों के अलावा बहुत से घरों मे भी कनहया की छठी और बरही भी मनाई जाती थी । जमाना बदला और लोग धीरे धीरे पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करते हुए इस त्योहार मे केवल खाना पूर्ति करने लगे  यद्यपि आज भी मंदिरो,महाराष्ट्र का हांडी प्रतियोगिता के अलावा बहुत से पुराने लोग अभी भी वैसे ही जन्माष्टमी मनाते है जैसे पहले मनाते थे।

गृहस्थ लोग कब मनाएंगे जन्माष्टमी और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त और नियम:-

शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस दिन वृष राशि में चंद्रमा व सिंह राशि में सूर्य था। इसलिए श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव भी इसी काल में ही मनाया जाता है। लोग रातभर मंगल गीत गाते हैं और भगवान श्री  कृष्ण का जन्मदिन मनाते हैं।

अष्टमी तिथि 11 अगस्त 2020  मंगलवार सुबह 9.06 बजे से लेकर 12 अगस्त की सुबह 11.15 बजे तक रहेगी। वहीं इन दोनों तिथियों में नक्षत्र का संयोग नहीं मिल रहा है। रोहिणी नक्षत्र 13 अगस्त को भोर से 3.26 से मिल रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अष्टमी तिथि को ही मनाया जाता है। इस वजह से पर्व 11अगस्त मंगलवार को स्मार्त यानी गृहस्थ जन्माष्टमी पर्व मना सकेंगे।

वहीं वैष्णव यानि साधु-सन्यासी, वैष्णव भक्त या वैष्णव गुरु से दीक्षा लेने वाले शिष्य 12 अगस्त 2020  को जन्माष्टमी पर्व मना सकेंगे। वैष्णव उदया तिथि मानते हैं। इस वजह से दो दिन पर्व का संयोग बन रहा है। इससे दो दिनों तक पर्व की धूम रहेगी।

भगवान वासुदेव के  पूजन का सरल तरीका

  • कृष्णजी या लड्डू गोपाल की मूर्ति को गंगा जल से स्नान कराएं। फिर दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, केसर के घोल से स्नान कराकर फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं। फिर सुन्दर वस्त्र पहनाएं। रात्रि बारह बजे भोग लगाकर पूजन करें व फिर श्रीकृष्णजी की आरती उतारें।
    उसके बाद भक्तजन प्रसाद ग्रहण करें। व्रती दूसरे दिन नवमी में व्रत का पारण करें।
  • श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शास्त्रों में इसके व्रत को व्रतराज कहा जाता है।
  • मान्यता है कि इस एक दिन व्रत रखने से कई व्रतों का फल मिल जाता है। अगर भक्त पालने में भगवान को झुला दें, तो उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
  • भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद के कृष्णपक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में होने के कारण इसको कृष्णजन्माष्टमी कहते हैं। चूंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी के निर्धारण में रोहिणी नक्षत्र का बहुत ज्यादा ध्यान रखते हैं।
  • इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करने से संतान प्राप्ति , दीर्घआयु तथा सुखसमृद्धि की प्राप्ति होती है।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाकर हर मनोकामना पूरी की जा सकती है।
  • जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर हो वे आज विशेष पूजा से लाभ पा सकते हैं।

 

श्रीकृष्णजन्माष्टमी के दिनों में ही इन बीमारियों ( Corona)से बचने के निरोग रहने के वैज्ञानिक व अचूक उपाय:-

  • आप सभी प्रत्येक वर्ष माह जुलाई से नवम्बर के मध्य होने वाली बड़ी छोटी साध्य असाध्य सभी बीमारियों ( विभिन्न प्रकार के बुखार ,इंसेफलाइटिस, फ्लू, चर्म रोग, खांसी ,स्वांस रोग और सबसे बड़ा रोग कोरोना इत्यादि ) से अच्छी तरह परिचित हैं ।
  • इनदिनों घरों में खुले में रखे खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण वातावरण में तेजी से बढ़ते खतरनाक वायरस और बैक्टिरिया हैं।
  • मित्रों मैं आपको लेकर इतिहास की तरफ जाना चाहता हूं कि सैकड़ों वर्ष पूर्व भी इन दिनों मे ऐसी ही बीमारियां होती थीं तब आज की तरह विज्ञान इतना बृद्धि नहीं किया था । इसके बावजूद भी लोग पेड़ पौधों , जड़ी बूटियों के माध्यम से अपनी रक्षा स्वयं कर लेते थे और आज से अधिक जीवित रहते थे।
  • आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आपके रसोई घर( किचन) में इस्तेमाल होने वाले मसालों में इन बीमारियों से लड़ने व इन बीमारियों को खत्म करने का अचूक उपाय है। उन्हीं मसालों में सुखी धनिया व तेजपत्ता पाउडर को भाद्रपद के कृष्ण पक्ष ,अष्टमी के रोहिणी नक्षत्र में इन पाउडर को भूनकर चीनी मिलाकर पंजीरी बना कर जन्माष्टमी के प्रसाद के रूप में खाने से ये बीमारियां रफूचक्कर हो जाती थीं
  • किन्तु धीरे धीरे बदलते समय के साथ-साथ लोग इस अचूक उपाय को भूलते चले गए। आज भी भारत वर्ष के कई प्रान्तों में इस प्रसाद को ग्रहण करने की परंपरा यथावत बनी हुई है।
  • अतः आप सभी से निवेदन है कि अपने पूरे परिवार के सुरक्षा कवच हेतु श्री कृष्ण जन्माष्टमी को रात्रि में अपने घर में भगवान के जन्म समय पर सुखी धनिया व तेजपत्ता के पाउडर की पंजीरी बनाकर प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें तथा प्रत्येक दिन सुबह ब्रश करने के पश्चात दो चम्मच जरूर ग्रहण करें। इससे चातुर्मास में होने वाली खतरनाक बीमारियों से कोसों दूर रहेंगे।

साभार:आचार्य राजेश कुमार ( www.divyanshjyotish.com)

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