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संन्यास के संकल्प का प्रतीक है गेरुआ वस्त्र, इस महत्त्व जान उड़ जाएंगे होश…

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गेरुआ रंग हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता हैं मोक्ष प्राप्ति का साधन नहीं हैं। इसके अलावा गेरुआ रंग का वस्त्र। इसके साथ ही यह तो मोक्ष के मार्ग पर चलने की प्रतिबद्धता का सूचक माना जाता हैं यह अपने आप में गंतत्व नहीं हैं, बल्कि उस ओर प्रस्थान की तैयारी हैं जब आप किसी काम के लिए तैयार होंगे, तभी उसे पूर कर पाने की संभावना बन सकती है।

वही तरतम में उतरना हो तो थोड़ा पागलपन होना जरूरी माना जाता हैं। इसके अलावा आपको बता दें की ये पागल होने के रास्ते हैं, और कुछ भी नहीं। ये जातक की होशियारी को तोड़ने के मार्ग हैं और कुछ भी नहीं हैं। ये समझदारी को पोंदने के मार्ग हैं और कुछ भी नहीं।

इसके साथ ही गेरुआ रंग का वस्त्र पहना दिया, बना दिया पागल, अब जहां जाओगे, वही हंसाई होगी। वही जहां जाओगे, लोग वहीं चैन से न खड़ा रहने देंगे। सब आंखें तुम पर होंगी। हर कोई तुमसे पूछेगा। क्या हो गया। हर आंख तुम्हे कहती मालूम पड़ेगी। कुछ गड़बड़ हो गई। तो तुम भी इस उपद्रव में पड़ गए। सम्मोहित हो गए।

जानकारी के लिए बता दें की गेरुआ वस्त्रों का अपने आप में कोई मूल्य नहीं हैं। कोई गेरुआ वस्त्रों से तुम मोक्ष को न पा जाओंगे। गेरुआ वस्त्रों का मूल्य इतना ही हैं कि तुमने एक घोषणा की, कि तुम पागल होने को तैयार हो। तो फिर आगे और यात्रा हो सकती हैं यहीं तुम डर गए तो आगे क्या यात्रा होगी। उंगली हाथ में आ गई तो पहुंचा भी पकड़ लेंगे। यह तो पहचान के लिए हैं कि आदमी हिम्मतवर है या नहीं।

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