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जलवायु संकट को लेकर 'भारत की ग्रेटा' बन UN के मंच पर छाई रिद्धिमा, जानें उनके बारे में

जलवायु संकट को लेकर भारत की ग्रेटा बन UN के मंच पर छाई रिद्धिमा, जानें उनके बारे में
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पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन को लेकर चर्चा जारी है। इसी को लेकर महज 16 साल की स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा टुनबर्ग दुनिया की स्टार बन गई हैं। जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए वो काफी समय से आंदोलन कर रही हैं, पर अपने देश की एक लड़की भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

उत्तराखंड के हरिद्वार की रहने वाली 11 साल रिद्धिमा पांडे का नाम अंतर्राष्ट्रीय नेताओं को जलवायु संकट पर फटकार लगाने वाले 16 युवाओं में शामिल हो गया हैं। रिद्धिमा सिर्फ़ भारत ही नहीं इन बच्चों में एशिया की अकेली बच्ची है।

रिद्धिमा कहती हैं, 'मैं एक बेहतर भविष्य चाहती हूं. मैं अपना भविष्य बचाना चाहती हूं. मैं सभी बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के सभी लोगों के भविष्य को बचाना चाहती हूं।'

रिद्धिमा पांडे न्यूयॉर्क में यूएन के उस क्लाइमेट एक्शन समिट में शामिल हुई हैं, जो पर्यावरण संरक्षण के नजरिये से बेहद अहम माना जा रहा है।

केदारनाथ आपदा के बाद हुई थी फिक्र

2013 में केदारनाथ में आई बाढ़ उत्तराखंड के लिए बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा थी। तभी रिद्धिमा को जलवायु परिवर्तन और उसके असर के बारे में पता चला। उस समय उसकी उम्र सिर्फ़ 5 साल थी। बता दें कि रिद्धिमा के पिता वन विभाग से जुड़े हैं।

9 साल की उम्र में सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका

रिद्धिमा ने जलवायु में बदलाव और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में रिद्धिमा ने कहा था कि भारत प्रतिकूल जलवायु परिवर्तन से निपटने में सबसे कमजोर देशों में से एक है। रिद्धिमा ने कोर्ट से मांग की थी कि औद्योगिक परियोजनाओं का आकलन किया जाये। कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन को सीमित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी योजना बनायी जाए। इसके लिए जुर्माने का प्रावधान किया जाए।

2017 में रिद्धिमा ने अभिभावकों की मदद से केंद्र पर जलवायु परिवर्तन और संकट से उबरने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए एनजीटी में अर्जी दी थी। उन्होंने हरिद्वार की अलग-अलग जगहों पर बारिश की वजह से होने वाली दिक्कतों का भी बारीकी से अध्ययन किया।

पिता की वजह से ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर हुईं सक्रिय

रिद्धिमा ने 2013 में जलवायु में रुचि लेनी शुरू की। 2013 में रिद्धिमा और उनके परिवार ने हरिद्वार में ऐसी ही विनाशकारी बारिश देखी जिससे भयंकर बाढ़ आई और कई लोगों की जानें चलीं गईं। पेशे से वन्यजीव संरक्षक रिद्धिमा के पिता ने उसे ग्लोबल वॉर्मिंग जैसी चीजों से बारे में बताना शुरू किया क्योंकि वह प्राकृतिक संकटों के बारे में लगातार सवाल पूछा करती थी।

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