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गाजियाबाद में धर्म संसद शुरु, सीएए के समर्थन में प्रस्ताव पारित

 

 

गाजियाबाद। हापुड़ रोड पर गोविन्दपुरम स्थित प्रीतम फार्म परिसर में रविवार को दो दिवसीय धर्म संसद शुरू हो गई। इस संसद में देश विदेश से आये सैकड़ों साधु संतों, पूर्व सैनिकों व किसानों ने भाग लिया। धर्म संसद के परम्परागत श्रीगणेश के बाद जगद गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानन्द सरस्वती जी महाराज की अध्यक्षता में सबसे पहले नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके इसे देश व मानव हित में बताया। धर्म संसद में सनातन धर्म के धर्मगुरुओं के साथ ही बौद्ध, जैन, सिख, पारसी, यहूदी तथा बहाई सम्प्रदाय के धर्मगुरुओं ने भी भाग लिया।

डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानन्द सरस्वती ने कहा कि मुगलों और अंग्रेजों के शासन काल में लिखे गए इतिहास को पुनः लिखने जरूरत है। आज भी हम भारतवासियों का दुर्भाग्य है कि हमें इतिहास के नाम पर लुटेरों को महान बताकर मूर्ख बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म व भारत राष्ट्र के इतिहास और धार्मिक साहित्य पर गहन शोध की आवश्यकता है।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानन्द सरस्वती ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि अपने गौरवशाली इतिहास से अपरिचित आज सनातन धर्म का युवा मानसिक और आध्यात्मिक भटकाव का शिकार होकर लक्ष्यविहीन होता जा रहा है।

कार्यक्रम के संयोजक कर्नल टीपीएस त्यागी ने सरकार से मांग की कि सरकार देश के हर नागरिक के लिए रूस, चीन और इजराइल की तरह तीन साल देश की फौज में अवैतनिक सैन्य सेवा अनिवार्य करे।

प्रयागराज उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश व छत्तीसगढ़ के पूर्व लोकायुक्त डॉ. शम्भूनाथ श्रीवास्तव ने श्रीमद्भावत गीता को भारत का राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित करने की मांग की।

इस मौके पर यहूदी धर्मगुरु इसाक मालेकर ने कहा कि भारत ही एक मात्र ऐसा राष्ट्र है जहां हमेशा से हर धर्म और समुदाय का व्यक्ति अपने स्वाभिमान और सम्मान के साथ अपना जीवन बिता सकता है।

सांस्कृतिक गौरव संस्थान और राष्ट्रीय सैनिक संस्था के संयुक्त तत्वावधान में धर्म संसाद का आयोजन किया गया है।

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