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लखनऊ में खुलेगा पुलिस और फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय

 

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में हुई कैबिनेट बैठक में 11 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में उत्तर प्रदेश में पुलिस और फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पुलिस और फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव हुए।

सूबे का पहला पुलिस और फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय राजधानी लखनऊ में स्थापित किया जा रहा है। सरोजनी नगर तहसील क्षेत्र में पंद्रह एकड़ भूमि चिह्नित कर पुलिस मुख्यालय द्वारा शासन को 350 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था। इस बार के बजट में सरकार ने परियोजना के लिए 20 करोड़ की धनराशि आवंटित भी की है।

आज कैबिनेट की बैठक में इसको लेकर उप्र पुलिस और फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय विधेयक 2020 को मंजूरी प्रदान की गई। सूत्रों के मुताबिक इसे गुजरात के फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय की तर्ज पर बनाया जाएगा। इसमें फोरेंसिक एक्सपर्ट तैयार किए जाएंगे। इस विश्वविद्यालय में भौतिकी, आग्नेयास्त्र विष विज्ञान, जीव विज्ञान, डीएनए, साइबर अपराध, रसायन व्यवहार विज्ञान एवं विधि जैसे विषयों से संबंधित विभाग होंगे।

बुन्देलखण्ड विंध्य क्षेत्र में 100 प्रतिशत वाटर पाइपलाइन के लिए 15 हजार करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही जनपद बांदा के बबेरू में बस अड्डे का निर्माण कराने लिए तहसील की जमीन मुहैया कराने को हरी झंडी दी गई। इसके तहत बबेरू पर पुरानी तहसील व परिसर में चिह्नित भूमि परिवहन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी।

नई दिल्ली स्थित उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यालयों के लिए लीज पर लिए गए सम्मिलित रूप से एक अनावासीय भवन किदवई नगर की अतिरिक्त साज सज्जा का कार्य करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट में मंजूरी मिली।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश फंडामेंटल रूल की मूल नियम 56 में संशोधन का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। कैबिनेट बैठक में वैट, मनोरंज कर, उत्तर प्रदेश केबिन टेलीविजन नेटवर्क, केंद्रीय बिक्रीकर अधिनियम और उत्तर प्रदेश व्यापार कर अधिनियम के तहत व्यापारियों पर 31 मार्च 2019 तक लंबित ब्याज और अर्थदंड माफ करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की गई।

बताया जा रहा है कि सरकार की ब्याज माफ करने की घोषणा से तीन लाख व्यापारियों को लाभ मिलेगा। ब्याज माफी के लिए आवेदन केवल विभागीय पोर्टल के जरिए लिए जाएंगे। छोटे व्यापारियों को स्थानीय स्तर पर कार्यालय में सुविधा दी जाएगी। इससे व्यापारियों को उत्पीड़न की कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी।

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