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बर्बादी की कगार पर धान जीआर 32, उकठा रोग से किसान परेशान

बर्बादी की कगार पर धान जीआर 32, उकठा रोग से किसान परेशान
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मीरजापुर। चुनार तहसील के जमालपुर ब्लाक अंतर्गत धान के कटोरे में पैदा होने वाला प्रमुख धान जीआर 32, बादशाह भोग की बालियोंं में उकठा रोग लग जाने से किसान परेशान हैंं। किसानों की खून- पसीने की कमाई बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई।

धान की नर्सरी डालने के बाद से ही किसान धान की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद लगाए थे, लेकिन अगस्त माह के बाद अच्छी बारिश नही होने व मौसम की बेरुखी के चलते धान की फसलों मे कीडे मकोड़े लगने लगे। इस दौरान किसान से लेकर कृषि रक्षा विभाग भी असहज दिखा। इन दिनों जीआर बत्तीस व बादशाह भोग की धान की बालिया पकने के बजाय उकठ जा रही हैं। धान में चावल के बजाय सिर्फ पइया हं, दाने नदारद हैं।

जीआर 32 धान की पैदावार के बदौलत ही इलाके को धान के कटोरे का दर्जा प्राप्त है। लेकिन मौसम की हर वर्ष पड़ने वाली मार के चलते इलाके से जीआर 32 की खेती दिन पर दिन कम होती जा रही है। इसके लिए किसान कई बार मिट्टी की जांच भी कराए लेकिन कोई ठोस कारण पता नहीं चल पाया है। इस सम्बन्ध में कृषि रक्षा इकाई जमालपुर के प्रभारी प्रवीण पांडेय ने बताया कि जीआर 32 व बादशाह भोग की धान की बालियो में रोग का कारण मौसम की बेरुखी है। दूसरी ओर सेमरा के किसान सुधीर मौर्य, चैकिया के किसान संतोष सिंह, चरगोडा के किसान महेंद्रनाथ सिंह, चौबेपुर के किसान दूधनाथ यादव का कहना है कि जी आर बत्तीस व बादशाह भोग की खेती दो-दो एकड जमीन किए हैं लेकिन उकठा रोग लग जाने से धान की फसल की लागत मूल्य भी निकलना मुश्किल लग रहा है।

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