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सुप्रीम कोर्ट के जजों खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी पर करना पड़ा भारी, 3 वकीलों को 3-3 महीने की सजा

सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ टिप्पणी करने वालों को कोर्ट ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि ‘लोग कोर्ट के फैसलों की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन किसी को भी जजों की मंशा या उनकी सदाशयता पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।’ सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि जजों को डराने धमकाने के प्रयासों से सख्ती से निबटना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह बात अपने जजों के खिलाफ मिथ्यापूर्ण और अपमानजनक आरोप लगाने वाले तीन लोगों को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराते हुए कही है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल को महाराष्ट्र एवं गोवा इंडियन बार एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुर्ले, इंडियन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नीलेश ओझा और एनजीओ ह्यूमन राइट्स सेक्यूरिटी काउंसिल के राष्ट्रीय सचिव राशिद खान पठान को जजों के खिलाफ अपमानजनक आरोप लगाने की वजह से सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराया और उन्हें तीन तीन महीने कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि यह एक तरह से न्यायपालिका को बंधक बनाने जैसा प्रयास था।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 27 मार्च को एडवोकेट मैथ्यू जे नेदुम्परा को कोर्ट की अवमानना और जजों को धमकाने का प्रयास करने पर तीन महीने कैद की सजा सुनाई थी। बाद में मैथ्यू नेदुम्परा द्वारा बिना शर्त क्षमा याचना करने पर सजा निलंबित कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसी दिन विजय कुर्ले, निलेश ओझा और राशिद पठान को भी सुप्रीम कोर्ट के दो पीठासीन जजों पर अपमानजनक आरोप लगाने के लिए अवमानना नोटिस जारी किए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इस बात का भी जिक्र किया कि इन तीनों को जब सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का दोषी पाया गया था तो इन तीनों के वकीलों ने कहा कि वह सजा में नरमी बरते जाने या सजा की अवधि के मुद्दे पर बहस नहीं करना चाहते थे।

कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि ‘सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ लगाए गए मिथ्यापूर्ण और अपमानजनक आरोप और इनके द्वारा किसी प्रकार का पाश्चाताप न व्यक्त करने के के मद्देनजर उनके साथ नरमी नहीं बरती जा सकती।’ कोर्ट ने कहा कि इसलिए तीनों अवमाननाकर्ताओं विजय कुर्ले, नीलेश ओझा और राशिद खान पठान को तीन तीन महीने की साधारण कैद और दो-दो हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए इनकी सजा 16 सप्ताह बाद से प्रभावी होगी। इन तीनों को अपनी सजा भुगतने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल के सामने सरंडर करना होगा और ऐसा न करने पर इनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किए जाएंगे।

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