Friday , June 5 2020
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अयोध्या मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने किसी समझौते से किया इनकार

 

 

लखनऊ। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की लखनऊ में आयोजित बैठक में साफ किया गया है कि अब बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद का समाधान बातचीत के रास्ते निकालने का दरवाजा बंद हो गया है। बोर्ड ने कहा है कि नवम्बर में इस विवाद का फैसला सुप्रीम कोर्ट से आने की उम्मीद है और बोर्ड ने वकीलों के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में जो दस्तावेज मुहैया कराए हैं, उसके आधार पर फैसला मुस्लिमों के पक्ष में आने की उम्मीद है।

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बोर्ड की बैठक में समान नागरिक संहिता का विरोध करने और तीन तलाक विधेयक के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने का भी फैसला लिया गया है। लखनऊ स्थित मदरसा नदवातुल-उलेमा में आयोजित बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता मौलाना राबे हसनी नदवी ने की जबकि बैठक में महासचिव मौलाना वली रहमानी के साथ कार्यकारिणी के अधिकांश सदस्य भी मौजूद थे।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी की बैठक ऐसे समय में हुई है जबकि सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद कि रोज सुनवाई हो रही है। नवंबर के पहले सप्ताह में अदालत इस विवाद पर अपना फैसला सुनाने की तैयारी कर रही है।

बोर्ड की बैठक में सुप्रीम कोर्ट में चल रही बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद पर सुनवाई के सम्बंध में विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बोर्ड की लीगल कमेटी ने अदालत में चल रहे मुकदमे के बारे में विस्तार से रिपोर्ट पेश की जिसमें कहा गया है कि जो सबूत और दलीलें अदालत में पेश की गई हैं उसके मद्देनजर अदालत से इंसाफ की उम्मीद है। बैठक में जब बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद का हल बातचीत के जरिए निकाले जाने पर चर्चा की गई तो बोर्ड ने साफ किया गया कि अब बातचीत के जरिए इस मामले के हल का सारा रास्ता बंद हो चुका है।

बोर्ड का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है और प्रतिदिन सुनवाई करके सुप्रीम कोर्ट इस पर अपना फैसला सुनाने वाला है। ऐसी स्थिति में अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत में वकीलों के माध्यम से जो दस्तावेज और दलीलें पेश की गई है उसके मद्देनजर अदालत से इंसाफ की उम्मीद है। ऐसी स्थिति में बोर्ड बाबरी मस्जिद की जगह को किसी भी हालत में हिंदू पक्ष को सौंपने के बारे में सोच भी नहीं सकता है। बोर्ड का यह भी स्पष्ट मत है कि जिस जगह एक बार मस्जिद बन जाती है वह जगह कयामत तक मस्जिद ही मानी जाती है।

बोर्ड की बैठक में समान नागरिक संहिता पर भी बातचीत की गई। बैठक में कहा गया है कि समान नागरिक संहिता बनाने से संविधान में दिए गए धार्मिक आजादी के मौलिक अधिकार का हनन होता है। हमारे देश में बहुत सारे धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं और उनके अपने अपने पर्सनल लॉ हैं। ऐसी स्थिति में समान नागरिक संहिता बनाने से आपस में टकराव बढ़ेगा। बैठक में तीन तलाक विधेयक को अदालत में चैलेंज करने का भी फैसला लिया गया है।

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