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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डॉ हर्षवर्धन आज लांच करेंगे कोरोना की दवा 2DG

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डॉ हर्षवर्धन आज लांच करेंगे कोरोना की दवा 2DG
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कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ भारत की जंग जारी है। इसी कड़ी में आज DRDO यानि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की ओर से विकसित कोरोना की दवा 2-डीजी (2DG ) की पहली खेप लॉन्च की जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन आज सुबह 10.30 बजे इस दवा को लॉन्च करेंगे। लॉन्चिंग के बाद अगले एक-दो दिनों में यह मरीजों को मिलने लग जाएगी। सूत्रों की मानें तो हैदराबाद की डॉक्टर रेड्डीज लैब में इसकी 10 हजार डोज़ बनकर तैयार हो गई है।

दवा को भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने आठ मई को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी थी। डीआरडीओ की लैब इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज द्वारा एंटी-कोविड दवा 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज को हैदराबाद स्थित डॉक्टर रेड्डी लैब के साथ मिलकर तैयार किया गया है।

कम होगी ऑक्सिजन पर निर्भरता

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि कोविड-19 की चल रही दूसरी लहर की वजह से बड़ी संख्या में मरीजों को ऑक्सीजन और अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ रही है.यह दवा कोरोना के सामान्य से गंभीर मरीजों को दी जा सकती है। 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज दवा मरीजों को तेजी से ठीक होने में मदद करेगी और ऑक्सिजन पर निर्भरता को कम करेगी।

पानी में घोलकर पीने वाली दवा एक सैशे में पाउडर के रूप में मिलेगी। इसे पानी में घोलकर कोरोना मरीजों को दिया जा सकता है। डीआरडीओ का दावा है कि ग्लूकोज़ पर आधारित इस 2-डीजी दवा के सेवन से कोरोना मरीजों को ऑक्सजीन पर ज्यादा निर्भर नहीं होना पड़ेगा। साथ ही वे जल्दी ठीक हो सकेंगे।

कैसे करती है काम

ये दवा वायरस से प्रभावित सेल्स में जाकर जम जाती है और वायरस सिंथेसिस व एनर्जी प्रोडक्शन को रोककर वायरस को बढ़ने से रोकती है। DRDO के परीक्षण के दौरान जिन कोरोना मरीजों को ये दवाई दी गई थी, उनकी RTPCR रिपोर्ट जल्द निगेटिव आई है। पिछले साल अप्रैल से इस दवा पर काम चल रहा था।

थोड़ा पहले ठीक हो रहे मरीज

परीक्षण में पाया गया कि कोरोना मरीज 2-डीजी दवा लेने से ढाई दिन पहले ही सही हो रहे थे यानी कि मानक इलाज प्रक्रिया (एसओसी) के मुकाबले 2-डीजी से किए इलाज का अधिक असर दिखा। डीआरडीओ ने बताया है कि इसे बेहद आसानी से उत्पादित किया जा सकता है। इसलिए पूरे देश में यह दवा जल्द ही आसानी से उपलब्ध हो जाएगी। क्योंकि इसमें बेहद जेनेरिक मॉलिक्यूल हैं और ग्लूकोस जैसा ही है।

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