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PM मोदी ने की सभी CMs के बैठक,जानिए क्या है कोरोना वायरस को लेकर बचाव की तैयारियां

PM मोदी ने की सभी CMs के बैठक,जानिए क्या है कोरोना वायरस को लेकर बचाव की तैयारियां
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के मद्देनजर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ गुरुवार को वर्चुअल बैठक की. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि, हमें माइक्रो कंटेनमेंट जोन पर फोकस करना चाहिए. कोरोना को रोकने के लिए हमें टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट पर ध्यान देना होगा. इस दौरान पीएम मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कोरोना पर लगाम लगाने के लिए सुझाव भी मांगे. बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कोरोना संक्रमण में अचानक हुई बढ़ोतरी पर चिंता जताई और कहा कि इस स्थिति में युद्ध स्तर पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा अगले तो तीन हफ्ते एहतियात बरतना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री ने साफ किया कि इस समय संपूर्ण लॉकडाउन की जरूरत नहीं है और नाइट कर्फ्यू ही लोगों में जागरूकता लाने के लिए काफी है।

70 फीसदी टेस्टिंग की जरुरत

पीएम ने कहा कि, संख्या बढ़ने से चिंता मत कीजिए. राज्य को आलोचना की चिंता नहीं करनी चाहिए. आप लगातार टेस्टिंग ज्यादा कर रहे हैं, इसलिए संख्या बढ़ रही है. जिसे आलोचना करनी है वो करेगा. टेस्टिंग पर जोर देने के बाद ही हम इसका उपाय कर पाएंगे. हमारा टारगेट 70 फीसदी आरटी-पीसीआर टेस्टिंग का है.प्रधानमंत्री ने टेस्टिंग के बाद बढ़ रहे कोरोना संक्रमण की संख्या को लेकर कहा कि इससे चिंतित नहीं होना चाहिए, बल्कि यही एक रास्ता है जिससे हम इससे बाहर निकलेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि सैंपल ढंग से लेना चाहिए। इस बारे में कुछ शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने राज्यों से कहा कि वह संख्या से न डरें और दूसरे राज्यों से तुलना न करें। कंटेनमेंट जोन के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि वहां पर एक भी व्यक्ति बिना टेस्ट के नहीं रहना चाहिए और संक्रमित का पता लगने के बाद उसके आस पास के कम से कम 30 लोगों का 72 घंटे से कम में टेस्टिंग होनी चाहिए। सतर्कता में कोई कमी ना रहे और कंटेनमेंट जोन में एसओपी का कड़ाई से पालन होना चाहिए।

टेस्ट,ट्रैक और ट्रीट पर दें जोर

पीएम ने नाइट कर्फ्यू को कोरोना कर्फ्यू के रूप में लेने की बात करते हुए कहा कि यह जागरूकता लाने के लिए बेहद जरूरी है। इससे बाकी व्यवस्थाएं प्रभावित नहीं होती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहली लहर में हम बिना वैक्सीन के मामलों को 10 लाख से सवा लाख तक ले आए थे। अब बस केवल टेस्ट,ट्रैक और ट्रीट पर जोर देना होगा। कोविड-19 से प्रोटोकाल का पालन करना होगा। साथ ही कोविड-19 प्रबंधन पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि इन दिनों के बिना लक्षण वाले मरीज ज्यादा आ रहे हैं और उनके कारण पूरा परिवार चपेट में आ जाता है। इसलिए प्रोएक्टिव टेस्टिंग जरूरी है। लक्षण ना होने पर भी हमें चीजों को हल्के में नहीं लेना होगा।

मृत्यु दर को लेकर एनालिसिस जरूरी

पीएम मोदी ने कहा कि, चर्चा के दौरान मृत्यु दर पर भी चिंता जताई. इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है. इसका कारण है कि लोग इसे मामूली समझते हैं और हालत बिगड़ने पर ही हॉस्पिटल आते हैं. जहां टेस्टिंग होती है. ये देखना जरूरी है कि किस स्टेज में बीमारी का पता चला, मौत के पीछे क्या-क्या कारण रहे. ये पूरा डेटा देखना होगा. एम्स दिल्ली हर मंगलवार और शुक्रवार को वेबिनार आयोजित करता है.प्रधानमंत्री ने कहा कि मृत्यु दर कम रहे इस पर जोर देना होगा। साथ ही उन्होंने टीकाकरण पर जोर देते हुए कहा कि 11 से 14 अप्रैल के बीच टीका उत्सव मनाया जाना चाहिए। इस दौरान विशेष अभियान चलाकर 45 साल से ऊपर के हर व्यक्ति को टीकाकरण करानाा चाहिए। 11 अप्रैल को ज्योतिबा फुले की जयंती है और 14 अप्रैल को डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमको वैक्सीन की बर्बादी भी रोकनी है। इस अवधि में प्रधानमंत्री ने युवाओं को आगे आने का आव्हान किया कि वे 45 साल से ऊपर के हर व्यक्ति को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें वहां तक ले जाएं।

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