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पैग़म्बर के कार्टून को लेकर पाकिस्तान में हुआ दंगा,फ़्रांस ने वापस बुलाये अपने 15 राजनायिक

पैग़म्बर के कार्टून को लेकर पाकिस्तान में हुआ दंगा,फ़्रांस ने वापस बुलाये अपने 15 राजनायिक
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पाकिस्तान में बृहस्पतिवार को प्रतिबंधित हुए संगठन तहरीक एलबैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने लाहौर में दंगे भड़का दिए। व्यवस्था बनाने सड़कों पर उतरी पुलिस पर उसके कार्यकर्ताओं ने हमले कर पांच पुलिस वालों को बंधक बनाया। बंधक पुलिसवालों में एक डीएसपी शामिल हैं, जिनकी बुरी तरह पिटाई की गई। पुलिस की कार्रवाई में तीन लोग मारे गए, सैकड़ों लोग घायल हैं।

इमरान खान आये आगे

पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के आगे घुटने टेकते हुए खुद प्रधानमंत्री इमरान खान डैमेज कंट्रोल के लिए उतरे। उन्होंने देश के नाम संबोधन में इमामों को संबोधित करते हुए उनसे हिंसा बंद करने की अपील की। इमरान ने भारत की तरफ इशारों-इशारों में कहा कि इस हिंसा से दुश्मनों को फायदा होगा। उन्होंने भारतीय न्यूज वेबसाइट्स के ऊपर भी अपनी खीज निकाली।

टीएलपी की मांग

टीएलपी के प्रवक्ता शफीक अमीन ने बयान दिया कि पुलिस ने लाहौर के कई इलाकों पर जमे उनके कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की, जिससे हिंसा हुई। यहां के यतीमखाना चौक पर एक हफ्ते से प्रदर्शनकारी बने हुए हैं। शफीक ने कहा कि मृतकों को तभी दफनाया जाएगा जब फ्रांस के राजदूत उनका देश छोड़ेंगे।

उनकी यह भी मांग है कि पाकिस्तान फ्रांस से सभी कारोबारी संबंध खत्म करे क्योंकि वहां पैगंबर के तथाकथित कार्टून का प्रकाशन हो रहा है। उन्हाेंने पुलिस पर ही अपने कार्यकर्ताओं के अपहरण का आरोप लगाया, लेकिन पुलिस ने कहा कि उन्हें कानून तोड़ने पर गिरफ्तार किया गया है।

फ़्रांस ने वापस बुलाये राजनायिक

फ्रांस ने पाकिस्तान से अपने 15 राजनयिकों को वापस बुला लिया है.पाकिस्तान में हिंसा के चलते अब तक 15 राजनयिक देश छोड़ चुके हैं या फिर निकलने की तैयारी में हैं। फ्रांसीसी अखबार ले फिगारो की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। बीते सप्ताह गुरुवार को ही फ्रांस ने अपने नागरिकों और कंपनियों को अस्थायी तौर पर पाकिस्तान छोड़ने की सलाह दी थी। पाकिस्तान में फ्रांस के विरोध में हिंसक प्रदर्शकों के बाद सरकार ने यह सलाह दी थी।

फ्रांसीसी दूतावास की ओर से अपने देश के नागरिकों को ईमेल पर सलाह दी गई थी। दूतावास ने लिखा था, 'पाकिस्तान में फ्रांसीसी हितों के सामने गंभीर खतरा है। ऐसी स्थिति में हमारी सलाह है कि फ्रांस के नागरिक और कंपनियां अस्थायी तौर पर देश से निकल जाए।' एयरलाइंस के जरिए फ्रांस के नागरिक पाकिस्तान से जा रहे हैं। अब फ्रांस की ओर से राजनयिकों को वापस बुलाए जाने से साफ है कि यूरोपीय देश और पाकिस्तान के बीच संबंध निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। फ्रांस की इमैनुएल मैक्रों की सरकार की ओर से व्यंग्य पत्रिका शार्ली हेब्दो में प्रकाशित पैगंबर के कार्टूनों का बचाव किया गया था। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच संबंधों में दरार देखने को मिल रही है।

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