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जानिए कितनी कारगर है भारत में बनी कोरोना की वैक्सीन,लगने के बाद इतने लोगों में हुआ इन्फेक्शन

जानिए कितनी कारगर है भारत में बनी कोरोना की वैक्सीन,लगने के बाद इतने लोगों में हुआ इन्फेक्शन
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कोरोना के खिलाफ जारी जंग में वैक्सीनेशन का काम जोरों पर जारी है. इस बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने दावा किया कि कोरोना वैक्सीनेशन प्रोग्राम (COVID-19 Vaccination) से संक्रमण को रोकने में काफी सफलता मिली है. ICMR का कहना है कि कोरोना वैक्सीन की पहली या दोनों डोज लेने लेने वाले केवल 0.04% लोग यानी कि 10,000 वैक्सीन लेने वाले लोगों में केवल 2 से 4 लोगों कोरोना संक्रमित पाए गए हैं.इसके अलावा कोरोना के कई विदेशी वैरिएंट्स से भी बचाती है। कोवैक्सिन को लेकर यह दावा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने बुधवार को किया। बता दें कि भारत समेत कई देशों में कोवैक्सिन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है। वहीं 60 अन्य देशों में मंजूरी के लिए बात चल रही है।

10 हज़ार में से 2 से 4 लोग हो रहे संक्रमित

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव के मुताबिक, वैक्सीनेशन करवाने के बाद 10 हजार लोगों में से 2 से 4 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं.वहीं नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य डॉ वीके पॉल के कहा, कोरोना का टीका लगवाने के बाद संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या बेहद कम है.उन्होंने ये भी कहा, यदि वैक्सीनेशन के बाद भी अगर लोग संक्रमित हुए हैं तो भी ये उन्हें गंभीर रूप बीमारी के रास्ते पर नहीं ले जाता है. हम सिस्टमैटिक रूप से डेटा इकट्ठा कर रहे हैं.'

कोविशील्ड अबतक 70 प्रतिशत प्रभावशाली रही है. वहीं कोवैक्सीन परीक्षण के तीसरे चरण के शुरुआती दौर में 81 प्रभावशाली रही है.कोविशील्ड औक कोवैक्सीन के दो-दो डोज दिए जा रहे हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के 10-15 दिन बाद ही व्यक्ति के अंदर पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी जनरेट हो जाती है.

100% तक कम हुई अस्पताल जाने की नौबत

वहीं इसे लेने के बाद इस संक्रामक बीमारी के कारण व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होने जरूरत 100 प्रतिशत तक कम हो जाती है। कोवैक्सिन के तीसरे चरण के अध्ययन में 25,800 प्रतिभागियों को शामिल किया गया जिनकी उम्र 18 से 98 साल थी। असर का आकलन दूसरी खुराक देने के 14 दिन बाद किया गया। भारत बॉयोटेक के चेररमैन और प्रबंध निदेशक कृष्ण एला ने कहा, 'सार्स-cov-2 के विरुद्ध इसके प्रभावी होने की बात स्थापित हुई है। कोवैक्सीन ने क्लिनिकल ट्रायल और इमरजेंसी इस्तेमाल के तहत बेहतर सुरक्षा देने की क्षमता दिखाई है।

10 करोड़ से ज्यादा लोगो को लग चुकी है वैक्सीन

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि कोवैक्सीन की 1.1 करोड़ डोज लगाई गईं हैं. इनमें से लगभग 93 लाख लोगों को पहली डोज लगाई गई. इनमें से 4208 लोग वैक्सीनेशन के बाद फिर से संक्रमित पाए गए. जबकि लगभग 17 लाख लोगों को कोवैक्सीन की दूसरी डोज दी गई, जिनमें केवल 695 में पॉजिटिव पाए गए.

बात अगर कोविशिल्ड की करें तो अबतक इस वैक्सीन की पहली डोज 10 करोड़ लोगों को लगाई गईं हैं. जिसमें से 17,145 लोग फिर से कोरोना संक्रमित हो गए. जबकि 1.5 करोड़ लोगों को कोविशिल्ड की दूसरी डोज लगाई गई, जिनमें 5014 लोग पॉजिटिव पाए गए.

30 साल से कम उम्र के लोगों पर दूसरी लहर का कम है असर

सरकार ने ये भी बताया कि महामारी की पहली लहर में 10 से 20 साल के आयुवर्ग में कोविड-19 के 8.07 प्रतिशत मामले आये थे, वहीं दूसरी लहर में 8.50 प्रतिशत मामले सामने आये हैं. कोराना की पहली लहर में 20 से 30 साल के आयुवर्ग में कोविड-19 के 20.41 प्रतिशत मामले आये, वहीं दूसरी लहर में इस आयुवर्ग के 19.35 प्रतिशत मामले रहे हैं. पहली लहर में 10 साल से कम उम्र के बच्चों में कोविड-19 के 4.03 प्रतिशत मामले थे , वहीं 2.97 प्रतिशत मामले दूसरी लहर में सामने आए.

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