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लखनऊ के प्रसिद्द इतिहासकार डॉ योगेश प्रवीण का निधन,जानिए क्या थी उनकी ख़ासियत

लखनऊ के प्रसिद्द इतिहासकार डॉ योगेश प्रवीण का निधन,जानिए क्या थी उनकी ख़ासियत
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लखनऊ के मशहूर इतिहासकार पद्मश्री योगेश प्रवीण का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। बीमार होने पर उन्हें बलरामपुर अस्पताल ले जाया जा रहा था। जहां रास्ते में ही उनका निधन हो गया। निधन की पुष्टि उनके छोटे भाई कामेश श्रीवास्तव ने की है। योगेश प्रवीण ने लखनऊ के इतिहास पर विशेष काम किया था.

पद्मश्री से नवाजे जा चुके थे

उन्हें साल 2020 में गणतंत्र दिवस के मौके पर पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया था। वे लखनऊ शहर के इतिहास और संस्कृति पर कई किताबें लिखी हैं। योगेश के पिता लेक्चरर थे और मां प्रिंसिपल। कहानियां भी लिखती थीं। जिन दिनों लड़कियां पर्दे में रहती थीं उन दिनों मेरी मां की दोस्ती कलम से थी। योगेश साइंस के छात्र थे। मेडिकल में सिलेक्शन भी हो गया था। एक साल डॉक्टरी की पढ़ाई की फिर तबीयत खराब हो गई और ऐसी खराब हुई कि चार-पांच साल यों ही बीत गए। जब सेहत ठीक हुई तो जमाना बीत गया था। एक जगह शादी की बात चल रही थी वह भी अधूरी रह गई।

लोग, रिश्तेदार ताने देते कि घर कैसे बसेगा? जिंदगी कैसे चलेगी।योगेश की मां सबको जवाब में जौक का शेर सुना देतीं कि रहता सुखन से नाम कयामत तलक है जौक...औलाद से तो है यही दो पुश्त चार पुश्त!! यानी आप जो लिखेंगे-पढ़ेंगे वह हमेशा आपका नाम जिंदा रखेगा, आपकी संतान तो दो पीढ़ी या चार पीढ़ी तक ही याद रखेगी।

योगेश के जेहन में यह बात घर कर गई। शुरुआत की कविताओं से। फिर गजलें, कहानियां, नृत्यनाटिका सब लिखे। अधूरी पढ़ाई भी पूरी की। डबल एमए किया। हिंदी और संस्कृत में।

इतिहास से बढ़ा प्रेम और बन गए इतिहासकार

योगेश बताते हैं कि एक बार किसी शहर घूमने गए तो वहां अलग-अलग शहरों का बखान किया जा रहा था। सबसे खराब बखान लखनऊ का था। योगेश को अफसोस हुआ। सोचा जिस शहर में पहली कहानी लिखी गई.. रानी केतकी की कहानी। जहां पहली नृत्य नाटिका लिखी गई .. इंद्रसभा.. जहां लखौरी की छोटी ईंटों से इमामबाड़ा बना दिया गया.. उसका बखान तो सबसे बढ़िया होना चाहिए। बस यही सोचकर शहर के बारे में लिखना शुरू किया और ऐसा लिखा कि प्रेसिडेंट अवार्ड और पदम्श्री मिला। लोगों ने उन पर पीएचडी की। देश-दुनिया से आज भी जो सैर करने आता है वह लखनऊ को योगेश प्रवीण की नजर से देखता है।


प्रसिद्ध किताबें

डॉ योगेश प्रवीण ने लखनऊ के इतिहास पर ढेरों किताबें लिखी थी. साथ अन्य रचनायें भी डॉ योगेश ने लिखीं थीं उनमे से कुछ खास इस प्रकार हैं..

  1. लखनऊ एवं अन्य प्रसिद्ध धरोहर
  2. बहारे अवध
  3. लखनऊ नामा
  4. रुलर्स ऑफ़ अवध:ताजिदारे अवध-नवाबी पीरियड
  5. मोनुमेंट्स ऑफ़ लखनऊ
  6. डूबता अवध
  7. आपका लखनऊ
  8. अनब्याही

और ऐसे ही ढेरों रचनाएं जो डॉ योगेश प्रवीण ने लिखीं हैं काफी चर्चित रहीं।


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