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आज के दिन भगवान विश्वकर्मा का हुआ था जन्म, यह है महत्त्व

पौराणिक काल के सबसे बड़े सिविल इंजीनियर माने जाने वाले इंजीनियरिंग और कला शिल्पकार क्षेत्र के वास्तुकार भगवान महर्षि विश्वकर्मा का जयंती आज पूरे देश भर में बड़े ही उत्साह पूर्वक मनाया जा रहा है l यह जयंती प्रत्येक साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को इससे जुड़े लोगों द्वारा बड़े ही आस्था के साथ मनाया जाता है l

आज के दिन भगवान विश्वकर्मा का हुआ था जन्म-

पौराणिक कथाएं की मान्यता के अनुसार महर्षि अंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहन भुवना की शादी अष्टम वसु महर्षि प्रभास से हुई थी l उनसे ही पूर्ण शिल्प विद्या के ज्ञाता प्रजापति विश्वकर्मा का जन्म अश्वनी मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन हुआ था l कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ब्रह्मा जी के वंशज थे l

पौराणिक मान्यता-

पौराणिक कथाओं की मान्यता के अनुसार सृष्टि की रचना के बाद भगवान ब्रह्मा ने धरती लोक पर इंजीनियरिंग और कला के क्षेत्र का विस्तार हो उसके लिए इसका जिम्मा उन्होंने भगवान विश्वकर्मा को दिया था l क्योंकि ब्रह्मा जी को पूर्ण भरोसा था कि उनके वंश से ताल्लुक रखने वाले भगवान विश्वकर्मा धरती लोक पर आम जनमानस के बीच इंजीनियरिंग और कलाओं का विस्तार लोगों के अंदर करके धरती लोक को भी स्वर्ग की तरह सजाने मे अपना सबसे बड़ा योगदान आम जनमानस को देंगे l

सृष्टि को स्थिर करवाने मे भगवान विश्वकर्मा का योगदान था-

कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना अंडाकार में करते हुए उसे शेषनाग के ऊपर रख दिए थे l शेष नाग के ऊपर रखे होने की वजह से उनके हिलने डुलने पर सृष्टि को भारी नुकसान होता था जिसके वजह से ब्रह्मा जी विश्वकर्मा से इसका समाधान पूछते हुए उनके कहने पर मेरु पर्वत को जल में रख कर सृष्टि को हमेशा के लिए स्थिर कर दिया था l

द्वापर और त्रेता युग में विश्वकर्मा ने ही इन शहरों का किया था निर्माण-

कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही स्वर्ग लोक, इंद्रपुरी, द्वारिका, जगन्नाथ पुरी, हस्तिनापुर और लंका का निर्माण अपने ही हाथों से किया था l

विश्वकर्मा ने ही बनाया था भगवान शंकर का त्रिशूल और विष्णु का सुदर्शन चक्र-

पौराणिक कथाओं की मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही अपने हाथों के कला से भगवान शंकर का त्रिशूल और भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र बना कर तैयार किया था l

इन जगहों पर मनाया जाता है Lord Vishwakarma was born on this day, this is the importance-

आज के दिन इंजीनियरिंग संस्थानों, कल कारखानों, ऑफिस और दुकानों मे काम करने वाले लोग अपने आराध्य देवता भगवान विश्वकर्मा का बड़े ही उत्साह पूर्वक उनकी मूर्ति को स्थापित करके इस क्षेत्र में प्रयोग होने वाले यंत्र व औजारों की लोगों द्वारा पूजा की जाती है l लोगों का मानना है कि आज के दिन घर, फैक्ट्री और दुकानों में रखें यंत्र व औजारों मैं भगवान विश्वकर्मा विद्यमान रहते हैं आज के दिन इसकी पूजा करने से पूरे साल अच्छा चलता है l

by-anand tripati