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जीवन हमेशा दूसरा मौका देता है जिसे हम 'कल' कहते हैं

जीवन हमेशा दूसरा मौका देता है जिसे हम कल कहते हैं
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शोभिता चौधरी (योग वेलनेस ट्रेनर)

यह किसी सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति ने कहा है और बहुत खूब कहा है। हमारे आज की जीवनशैली को और परिस्थितियों को देखें तो यह वाक्य सटीक बैठता है, कोरोना काल के आने के बाद से ना जाने कितने ही परिवारों ने अपने सदस्य खोए हैं और अभी भी मरने वालों की संख्या अपने कदम बढ़ाती जा रही है। सोचने की बात यह है कि ऐसा हो क्यों रहा है?

बुद्धिमान मानव जाति के सदस्यों ने बहुत कुछ कारण दिए परंतु मेरी समझ में सबसे बड़ा कारण लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना है, जिसका कारण उनकी जीवन शैली है! अब यह जीवन शैली होती क्या बला है? अंग्रेजी में हम इसको लाइफ स्टाइल बोलते हैं, साधारण हिंदी में आपके जीवन यापन का तरीका और उससे भी सरल भाषा में आप अपना जीवन जीते कैसे हैं। हर रोज जो यह आपको दूसरा मौका मिलता है उसमें आप अपने लिए और अपने अपनों के लिए क्या फैसले या निर्णय लेते हैं, आपकी प्राथमिकता सूची में क्या पहले है वह बहुत ही महत्वपूर्ण है। आपकी एक छोटी सी सोच भी आपकी जीवनशैली निर्धारित कर सकती है या यूं कहें आपकी सोच इतनी महत्वपूर्ण है कि वह आपकी दिनचर्या जीवनशैली पहले प्रभावित करती है और फिर निर्धारित करती है।

उदाहरण के लिए छोटी सी चीज की आदत ले लीजिये, चाय, क्या मैं चाय पियूं या नहीं? शक्कर लूं या गुड यह शुगर फ्री लूं? बेड टी लूं सुबह उठते ही या पानी पियूं पहले? या नाश्ते के बाद चाय लूं? बाप रे बाप!!! छोटी सी चीज एक आदत चाय का कप और इतने सवाल यह तो सिर्फ शुरुआत थी जनाब, आप चिंता मत कीजिए हम सवालों का पूरा पॉथी नहीं बांचेंगे, अब आप बेफिक्री से आगे बढ़ सकते हैं।

सवाल यह है कि ऐसे कितने ही छोटे-छोटे प्रश्न हमारे जीवन को निर्धारित करते हैं और उसका निर्माण करते हैं और किसी भी विषय पर निर्णय लेने से पहले उसका ज्ञान होना बहुत जरूरी है। धन्य हो इंटरनेट जिसकी वजह से कुछ ज्ञान तो बट रहा है परंतु क्या वह पर्याप्त है? कोरोना काल में अगर आप जीवित है तो धन्यवाद कीजिए अपना और उन लोगों का जो आपके जीवन की शैली निर्धारित करते हैं। इस दूसरे मौके का महत्व समझाइए, व्यायाम, खानपान, निद्रा, दिमागी सेहत, भावनात्म स्थिरता, जागरूकता और आत्मज्ञान यह सब और भी बहुत कुछ अपने जीवन में आत्मसात कीजिए। यही उत्तम श्रेणी के जीवन का राज है।

जीवन के इस मौके को व्यर्थ ना करें जाने और समझे यह हर किसी को नहीं प्राप्त होता। अंत में हम अपने वेदों में से अथर्ववेद के एक श्लोक का अर्थ आपसे मुख्यतः साझा करना चाहेंगे–रजोमय-भोगम्य जीवन मृत्यु का उपकरण है। ज्ञान बोध द्वारा संयम जीवन की प्रेरणा देना व्यक्ति को मृत्यु के प्रहार से बचाने के लिए कवच धारण करने जैसा है।

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