Thursday , May 28 2020
Home / अदालत / पत्रकार अर्नब की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित, गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी

पत्रकार अर्नब की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित, गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी

उच्चतम न्यायालय ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी की याचिका पर सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया और उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करने का अपना पूर्व का आदेश आगे बरकरार रखा। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की खंडपीठ ने अर्नब गोस्वामी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायालय ने कहा कि अर्नब को गत 24 अप्रैल को गिरफ्तारी से मिली राहत फैसला आने तक जारी रहेगी। ये राहत नयी याचिका पर भी जारी रहेगी।

अर्नब ने महाराष्ट्र के पालघर की मॉब लिंचिंग की घटना के बाद पुलिस की भूमिका और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाये थे, जिसके बाद छह राज्यों में 16 से अधिक प्राथमिकियां दर्ज की गई थी, उसके बाद वह शीर्ष अदालत पहुंचे थे। उन्हें उस मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिली थी।

पिछले दिनों एक और प्राथमिकी दायर की गयी थी, जिसके खिलाफ एक बार फिर उन्होंने न्यायालय का रुख किया था और राहत की मांग की थी। दोनों ही मामले में न्यायालय ने याचिकाकर्ता को राहत दी है।

इससे पहले सुनवाई की शुरुआत करते हुए साल्वे ने कहा कि याचिकाकर्ता के टीवी कार्यक्रम में सांप्रदायिक बात नहीं कही गई। उससे कोई दंगा नहीं हुआ। पालघर में महाराष्ट्र पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। अब पुलिस ही अर्नब की जांच कर रही है, इसलिए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी जाये।

महाराष्ट्र सरकार के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि केंद्र सरकार जांच अपने हाथ में लेना चाहती है, हालांकि सॉलिसिटर जनरल ने सिब्बल की इस दलील का पुरजोर विरोध किया।

साल्वे ने कहा कि जांच का जिम्मा सीबीआई को दिए जाने की बात पर सिब्बल का एतराज़ दिखाता है कि समस्या राजनीतिक है। केंद्र और राज्य के झगड़े में एक पत्रकार को निशाना बनाया जा रहा है। अर्नब से पुलिस ने चैनल के मालिक, सर्वर, खबरों की चयन प्रक्रिया जैसी बातें पूछीं।

अभिव्यक्ति की आज़ादी को ऐसे निशाना बनाने का दूरगामी असर होगा। इस पर मेहता ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है, लेकिन एक खबर दिखाने के लिए किसी को 12 घंटे तक थाने में बैठाकर पूछताछ करना उचित नहीं लगता। उन्होंने सलाह के लहजे में कहा कि शीर्ष अदालत को निष्पक्ष जांच की मांग पर विचार करना चाहिए।

TwitterFacebookLinkedInWhatsAppEmailTumblr
Loading...

Check Also

ज़ारी है टिड्डियों का आतंक,इन राज्यों में मचा सकती हैं तबाही

कोरोना वायरस के बाद,एक और बड़ी गंभीर समस्या ने देश में सिरदर्नद बना हुआ है.ये …

TwitterFacebookLinkedInWhatsAppEmailTumblr

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com