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शादी के लिए धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं : हाईकोर्ट

-झूठ बोलकर धर्म परिवर्तन करा निकाह करने वाले आरोपी की जमानत याचिका खारिज

 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झूठ बोलकर धर्मान्तरण करा निकाह करने वाले आरोपी जावेद उर्फ जाविद अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि शादी एक पवित्र संस्कार है। शादी के लिए धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता ने बयान दिया कि आरोपी पहले से शादीशुदा था। सादे व उर्दू में लिखे कागज पर दस्तखत कराए। झूठ बोला और धर्म बदलवाया। कोर्ट ने अपहरण, षड्यंत्र व धर्मांतरण कानून के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने दिया है।

 

याची का कहना था कि दोनों बालिग हैं। अपनी मर्जी से धर्म बदलकर शादी की है। धर्मांतरण कानून लागू होने से पहले ही धर्म बदल लिया गया था। पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह 17 नवम्बर 20 शाम पांच बजे जलेसर बाजार गयी थी। कुछ लोगों ने जबरन गाड़ी में डाल लिया। दूसरे दिन जब कुछ होश आया तो वकीलों की भीड़ में उसने अपने को कड़कड़डूमा कोर्ट में पाया। वहीं कागजों पर दस्तखत लिए गए। 18 नवम्बर को धर्मांतरण कराया गया और फिर कई जगहों पर ले गये। 28 नवम्बर को निकाह कराया गया। जब मौका मिला तो मैंने पुलिस को बुलाया। 22 दिसम्बर को पीड़िता को पुलिस ने बरामद किया।