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हनुमान जयंती:जानिए हनुमान जी के बारे में कुछ विशेष बातें,और आज की पूजा विधि

हनुमान जयंती और हनुमत कथा:-

  • केसरी नंदन हनुमानजी के बारे में कई ऐसी बाते हैं जो उन्हें  खास बनाती हैं। पौराणिक मत के अनुसार हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जो त्रेतायुग से लेकर आज तक और सृष्टि के अंत तक अपने शरीर के साथ इस धरती पर मौजूद हैं। 
  • धार्मिक मान्यता तो यह भी है कि जहां भी राम कथा होती है वहां हनुमानजी किसी ना किसी रूप में मौजूद रहते हैं।
  • चिरंजीवी हनुमानजी के जन्म स्थान और जन्मतिथि को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। 

बाल्मिकी रामायण में हनुमान जयंती:-

  • बाल्मिकी रामायण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि मंगलवार के दिन स्वाती नक्षत्र में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन हनुमानजी का प्राकट्य हुआ था।
  • जबकि एक अन्य मान्यता के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को बजरंगबली का जन्म हुआ था। इस वर्ष यह तिथि 8 अप्रैल 2020 दिन बुधवार को है। इस तरह हनुमानजी का जन्मदिन पूरे देश 2 बार मनाता है।

हनुमान जी का जन्म स्थान :-

  • हनुमानजी की जन्मतिथि को लेकर जैसे एक मत नहीं है उसी प्रकार उनके जन्मस्थान को लेकर भी एक मत नहीं है। 
  • एक मत के अनुसार झारखंड के गुमला जिले में एक गांव है जिसका नाम आंजन है। यहीं एक गुफा में हनुमानजी का जन्म हुआ था। यहां हनुमानजी की एक प्राचीन प्रतिमा है जिसे इस बात का प्रमाण बताया जाता है कि यहीं शिव भक्तिनी अंजनी ने हनुमानजी को जन्म दिया था।
  • हनुमान जी के जन्म स्थान को लेकर चर्चित स्थानों में कर्नाटक का हंपी भी प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां रामायण काल में किष्किंधा नगरी हुआ करती थी, जहां के राजा सुग्रीव थे। यहीं हनुमानजी के पिता केसरी जी रहा करते थे। इसके अलावा गुजरात के डांग जिले के लोग भी यह दावा करते हैं कि यहां अंजनी गुफा में हनुमानजी का जन्म हुआ था। हनुमानजी के जन्मस्थान और जन्मतिथि को लेकर जो भी मत हो लेकिन इनके दोनों ही जन्मतिथि पर इनही पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
चैत्र मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती होने की वजह से हिंदू धर्म में इसका बड़ा ही महत्व है। 
  • इस वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 7 अप्रैल को दिन में 2 बजकर 33 मिनट पर लग रही है और यह अगले दिन यानी 8 अप्रैल सुबह 8 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। इसलिए हनुमान जयंती की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सूर्योदय से 8 बजकर 3 मिनट तक है।
  • वैसे हिन्दू मतानुसार जिस तिथि में सूर्योदय होता है पूरे दिन उस तिथि की मान्यता रहती है। इसलिए आप पूरे दिन हनुमानजी की आराधना कर सकते हैं।

कैसे करें हनुमान जयंती की पूजा:-

  • हनुमान जयंती के दिन  हनुमानजी को चोला, सिंदूर और लड्डू अर्पित करने की परंपरा है। 
  •   इस दिन हनुमानजी की प्रसन्नता के लिए हनुमान भक्तों को हनुमान चालीसा, सुंदर कांड, बजरंग बाण और रामायण का पाठ करना चाहिए।
  •  हनुमानजी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर लेपन करना चाहिए। चमेली या सरसों के तेल से दीप जलाएं और लाल रंग की बाती का प्रयोग करना चाहिए।
  • इतिहास गवाह है कि जो भी भक्त प्रभु हनुमान जी के शरण में रहा है उसके समस्त सांसारिक कार्य पूर्ण हो ही जाते हैं । हनुमत शरण का तात्पर्य उनके प्रति भक्त का निश्छल, अगाध प्रेम से है।
  • हनुमान जी ऊपर से पानी नारियल के कवच के समान अत्यधिक कड़क परन्तु दिल की गहराइयों से बिल्कुल उस नारियल की गिरी के समान नरम व्यक्तित्व के हैं।
  • उनका स्वभाव है कि वह बहुत जल्दी प्रसन्न या नाराज़ नहीं होते हैं। अनेकों अनेक कथाओं में यह प्रमाण मिलता है कि हनुमान जी मुसीबत में अपने भक्तों का किसी ना किसी रूप में साथ अवश्य ही देते हैं।

लेख साभार:आचार्य राजेश कुमार,दिव्यांश ज्योतिष केंद्र

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