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सफेद कद्दू की खेती ने बदली तकदीर, मालामाल हो रहे किसान

सफेद कद्दू की खेती ने बदली तकदीर, मालामाल हो रहे किसान
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आगरा के पेठा बनाने वाले खरीद रहे हैं खेतों में उत्पादित कद्दू


मीरजापुर। जिले के छानबे, कोन और सीखड़ ब्लॉक के किसानों के लिए सफेद कद्दू का उत्पादन काफी लाभदायक साबित हो रहा है। इन ब्लॉकों के किसान परंपरागत फसलों की खेती को छोड़कर अब खरीफ के सीजन में सफेद कद्दू की खेती कर रहे हैं। इससे जहां किसानों को नगद रूपये मिल जा रहे है। वहीं परम्परागत खेती पर खर्च होने वाली धनराशि की भी बचत हो रही है।

इन ब्लॉकों के किसान लंबे समय से परम्परागत खरीफ की फसलों ज्वार, बाजरा, अरहर, तिल और धान की फसल की खेती करते थे। इन फसलों की बुवाई के लिए किसानों को जहां खेत की जुताई के लिए भारी रकम खर्च करनी पड़ती थी। वहीं धान की फसल की रोपाई के लिए निजी पम्पसेटों से पानी का भी जुगाड़ करना पड़ता था। खासकर धान की फसल की सिंचाई पर ही भारी रकम खर्च हो जाती थी।

इस वर्ष जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने इन ब्लाकों के किसानों को सफेद कद्दू की खेती की सलाह दी। इसका असर यह रहा कि तीनों ब्लाकों में लगभग पांच सौ एकड़ में सफेद कद्दू की खेती किसानों ने कर ली। सफेद कद्दू की खेती पर किसानों की लागत भी घटकर एक चौथाई हो गयी। जब फसल तैयार हुई तो उद्यान विभाग की मदद से ही आगरा की पेठा बनाने वाली कम्पनियों के एजेंट किसानों से सम्पर्क कर बेहतर मूल्य पर खरीद-फरोख्त शुरू कर दिए।

मेवशी भी नहीं चरते सफेद कद्दू की फसल

बेसहारा मवेशियों के फसल नष्ट करने का खतरा हमेशा बना रहता है। छुट्टा मवेशी झुंड के झुंड में पहुंच कर चना, मटर, सरसों और गेंहू की फसल को चरकर बर्बाद कर देते हैं लेकिन सफेद कद्दू की फसल को मवेशी क्षति नहीं पहुंचाते हैं। जिससे किसानों को इसकी देखभाल में ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ती है।

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