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भारत में पहली बार बायोफ्यूल से उड़ा विमान, जानें क्या है इसकी खासियत?

भारत में पहली बार बायोफ्यूल से उड़ा विमान, जानें क्या है इसकी खासियत?
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डोईवाला: भारत के एयरलाइन सेक्टर में नई क्रांति का आगाज हो गया है। देश में पहली बार बायोफ्यूल फ्लाइट ने देहरादून से दिल्ली की बीच सफल उड़ान भरकर इतिहास कायम कर दिया। इस उड़ान के साथ ही भारत का नाम अब उन देशों की लिस्ट में शुमार हो गया, जो बायोफ्यूल का प्रयोग फ्लाइट के संचालन के लिए करते हैं। सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थानने जैट्रोफा की मदद से ये बायोफ्यूल तैयार किया था। इस खास मौके के लिए एयरलाइन कंपनी स्पाइस जेट ने टर्बोपार्प क्यू-400 विमान तैयार किया था। विमान को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने झंडी दिखाकर दिल्ली के लिए रवाना किया।

टर्बोपार्प क्यू-400 एयरक्रॉफ्ट ने दून से दिल्ली को भरी उड़ान

दरअसल, सोमवार को स्पाइसजेट के 72 सीटों वाले टर्बोपार्प क्यू-400 एयरक्रॉफ्ट देहरादून से उड़ान भरकर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर दिल्ली पहुंचा। इस विमान में बायोफ्यूल का इस्तेमाल किया गया था। इस ट्रायल फ्लाइट के लिए बयोफ्यूल सीएसआईआर- भारतीय पेट्रोलियम संस्थान की ओर से तैयार किया गया था। 25 मिनट की इस उड़ान के दौरान इस विमान में डीजीसीए के अधिकारियों सहित कुल 20 लोग सवार थे। जब सफल उड़ान के बाद एयरक्राफ्ट देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर उतरा तो अफसरों के चेहरे खिले हुए थे।

ईंधन की खपत होगी 50 प्रतिशत तक कम

स्पाइस जेट के चीफ स्टेटिक्स जीपी गुप्ता ने कहा कि स्पाइस जेट ने देश में बायो फ्यूल से उडऩे वाले विमान का सपना साकार कर दिया है। उन्होंने उड़ान के बारे में बताते हुए कहा कि स्पाइसजेट के इस विमान में 75 फीसदी एयर टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) और 25 फीसदी बायोजेट फ्यूल का प्रयोग किया गया। एटीएफ की तुलना में बायोजेट फ्यूल ज्यादा फायदेमंद है। ये कार्बन का उत्सर्जन कम करता है, साथ ही विमान की ईंधन दक्ष बनाता है।

इन देशों में हो चुका बायोफ्यूल वाली उड़ान का प्रयोग

जौलीग्रांट एयरपोर्ट के निदेशक विनोद शर्मा ने कहा कि बायोफ्यूल के फायदे गिनाते हुए कहा कि, इसके इस्तेमाल से एयरलाइन कंपनियों को घाटे से उबरने में मदद मिलेगा। क्योंकि यह ईंधन खपत कम करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया मे भी जैव इंधन से सफल उड़ान भरी जा चुकी है। शर्मा ने कहा कि यह गौरव का विषय है कि इस एतिहासिक उड़ान के लिए उत्तराखंड को चुना गया।

स्पाइस जेट ने खासतौर पर डिजाइन किया एयरक्राफ्ट

स्पाइसजेट के इस विमान को कैनेडियन कंपनी बॉमबाडियर ने डिजाइन किया है. स्पाइसजेट के पास मौजूदा वक्त में 36 बोइंग 737NG और 22 बॉम्बाडियर Q400 प्लेन हैं। रोज़ाना स्पाइसजेट 412 उड़ाने भरती है। ग्लोबल एयरलाइन बॉडी आईएटीए के मुताबिक इस वक्त ग्रीनहाउस गैस के में एविएशन सेक्टर 2 फीसदी तक गैसों का उत्सर्जन करता है।आईएटीए ने साल 2025 तक मिक्स फ्यूल एनर्जी के इस्तेमाल के जरिए 100 करोड़ लोगों के उड़ना भरने का लक्ष्य रखा है।

कम होगा फ्लाइट का खर्च

भारतीय एविएशन सेक्टर ने बढ़ती तेल की कीमतों के कारण परेशानी जाहिर की है और सरकार से एविएशन टर्बाइन फ्यूल को जीएसटी के दायरे में जोड़ने की सिफारिश की है ताकि तेल के बढ़ते दाम पर लगाम लगाई जा सके। ऐसे में देश में पहली बायोफ्यूल फ्लाइट ने भारतीय एविएशन की दुनिया में नई उम्मीद जगाई है। अगर भविष्य में विमानों में बायोफ्यूल का प्रयोग होने लगा तो हर साल 4000 टन कार्बन डाई ऑक्साइड एमिशन की बचत होगी।

ऑपरेटिंग लागत होगी 20 प्रतिशत तक कम

इसके अलावा ऑपरेटिंग लागत भी 17% से 20% तक कम हो जाएगी। दरअसल, भारत में बायोफ्यूल का आयात तेजी से बढ़ रहा है। 2013 में 38 करोड़ लीटर बायोफ्यूल की सप्लाई हुई, जो 2017 में 141 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी थी। कुल कार्बन डाई ऑक्साइड एमिशन में एयर ट्रैवल की भूमिका 2.5% है, जो अगले 30 साल में 4 गुना तक बढ़ सकती है। बायोफ्यूल इसी एमिशन पर काबू रख सकता है।

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