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सरकार की लचर व्यवस्था के चलते उत्तराखंड की पहली लोक गायिका का निधन

सरकार की लचर व्यवस्था के चलते उत्तराखंड की पहली लोक गायिका का निधन
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70 के दशक में पहली बार पहाड़ के गांव से स्टूडियो पहुंचकर रेडियो जगत में अपनी आवाज से पर्वतीय क्षेत्र के लोक गीतों को पहचान दिलाने वाली उत्तराखंड की लोक गायिका कबूतरी देवी का शनिवार को निधन हो गया. उनकी बिगड़ती हालत को देखकर डॉक्टरों ने हायर सेंटर रेफर किया था.लेकिन धारचूला से हवाई पट्टी पर हेलीकॉप्टर के न पहुंच पाने के कारण उनकी हालत बिगड़ गयी और उनका निधन हो गया.

राज्य सरकार की लचर व्यवस्था के चलते

जानकारी के मुताबिक, पिथौरागढ़ के जिला अस्पताल में भर्ती थी. उन्हें देहरादून ले जाने के लिए गत शाम से हेलीकॉप्टर का इंतजार होता रहा. धारचूला से हवाई पट्टी पर हेलीकॉप्टर के न पहुंच पाने के कारण वो इलाज के लिए हायर सेंटर नहीं जा पाई. इस दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें वापस जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद उनका निधन हो गया.

कुमाऊं कोकिला के नाम से फेमस

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कबूतरी देवी ने पर्वतीय लोक शैली को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया था. उत्तराखंड की तीजनबाई कही जाने वाली कबूतरी देवी ने पहली बार दादी-नानी के लोकगीतों को आकाशवाणी और प्रतिष्ठित मंचों के माध्यम से प्रचारित और प्रसारित किया था. जब इन्होंने आकाशवाणी पर गाना शुरू किया, जब तक कोई महिला संस्कृतिकर्मी आकाशवाणी के लिए नहीं गाती थीं.

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