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धनंजय सिंह करें सरेंडर नहीं तो भगोड़ा घोषित करने की तैयारी,जानिए धनंजय सिंह का इतिहास

धनंजय सिंह करें सरेंडर नहीं तो भगोड़ा घोषित करने की तैयारी,जानिए धनंजय सिंह का इतिहास
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लखनऊ के चर्चित अजीत सिंह हत्याकांड मामले में हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का फरमान सुनाया है. बेंच ने कहा कि धनंजय पहले आत्मसर्पण करे और इसके बाद जमानत याचिका दाखिल करें. लखनऊ में सोमवार को हाई कोर्ट बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत पांच लोग सरेंडर नहीं करते तो उन सभी को भगोड़ा घोषित करने की कार्यवाही होगी.

गोमतीनगर में हुई थी अजित सिंह की ह्त्या

विभूतिखंड थानाक्षेत्र के कठौता चौराहे पर 6 जनवरी की रात 8.30 बजे ताबड़तोड़ फायरिंग कर मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना के पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की हत्या कर दी गई। इस दौरान उसके करीबी मोहर सिंह व राहगीर आकाश यादव भी घायल हुए। इस वारदात में एक हमलावर राजेश तोमर भी गंभीर रूप से घायल हुआ था। पुलिस ने इस मामले मेें गिरफ्त में आये शूटरों व अन्य आरोपियों के बयान के आधार पर जौनपुर के पूर्व सांसद व बाहुबली नेता धनंजय सिंह को हत्या की साजिश रचने का आरोपी बनाया। धनंजय सिंह ने ही शूटरों के रहने का ठिकाना दिलाया था।

वहीं गैंगवार में घायल शूटर राजेश तोमर के इलाज का पूरा इंतजाम कराया था। चाहे लखनऊ में अपने फ्लैट में चिकित्सक बुलाने का मामला हो या सुल्तानपुर में निजी अस्पताल में इलाज का। पुलिस ने सांसद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कराया। इसके बाद उन्होंने 5 मार्च को प्रयागराज की कोर्ट में पुराने मामले की जमानत तुड़वाकर आत्मसमर्पण कर दिया। करीब 25 दिन बाद ही उनको इसी मामले में कोर्ट ने जमानत दे दी। इसके बाद से वह अंडरग्राउंड हो गये।

25 दिन बाद ज़मानत पर बाहर

इस मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह के मददगार विपुल सिंह, प्रदीप सिंह कबूतरा, कुणाल कुमार, शूटर रवि यादव की भी तलाश की जा रही है। धनंजय सिंह पांच मार्च को पुराने मामले में जमानत कटवा कर प्रयागराज कोर्ट में हाजिर हो गए थे। 25 दिन बाद इसी मामले में धनंजय सिंह फिर जमानत पर बाहर आ गए। अब वह फिर पुलिस की रडार पर है। इन आरोपियों की सम्पत्ति कुर्क करने की अनुमति मिलते ही पुलिस डुगडुगी पिटवायेगी।

सबसे पहले 21 जनवरी को गिरफ्तार शूटर संदीप सिंह उर्फ बाबा ने इस हत्याकाण्ड का पूरी तरह से खुलासा किया था। उस समय उसने ही एक शूटर रवि यादव का नाम लिया था। पर, इसके बाद पकड़े गये हर शूटर व मददगार ने रवि यादव का नाम नहीं लिया। अंकुर, राजेश तोमर व मुस्तफा सभी ने रवि यादव के नाम से अनभिज्ञता जताई। अब पुलिस का मानना है कि इस शूटर का नाम रवि यादव नहीं बल्कि कुछ और है। संदीप ने उसका नाम फर्जी लिया था। कुछ मुखबिरों ने इस शूटर का नाम सोनू बताया है। पर, विभूतिखंड पुलिस अभी इस बारे में पड़ताल कर रही है। इसी सिलसिले में एक टीम फिर दिल्ली भेजी गई है।

कौन हैं धनंजय सिंह ?

धनंजय सिंह का जन्म बंसपा गांव में 20 अक्टूबर 1972 को हुआ था वे छात्र जीवन से ही राजनीति में एक्टिव रहे हैं. साल 2002 में वे पहली बार निर्दलयी प्रत्याशी के रूप में रारी विधानसभा से चुनाव जीतते हैं और साल 2007 में जनता दल यूनाइटेड से फिर सपा के लाल बाहादुर यादव को हराकर जीत दर्ज करते हैं. इसके बाद साल 2009 में बहुजन समाज पार्टी ने जौनपुर सदर से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया. इस दौरान भी धनंजय सिंह ने भारी मतों से जीत हासिल की. साल 2009 में ही उन्होंने बसपा के बलबूते अपने पिता राजदेव सिंह को सदन पहुंचाया था. लेकिन सीट बंटवारे के कारण धनंजय सिंह का पार्टी से मनमुटाव शुरू हुआ जिसके बाद उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया. साथ ही उन्हें जेल भी भेज दिया गया. बता दें कि जब वे जेल में थे, उस दौरान अपनी पत्नी जागृति सिंह को उन्होंने मल्हनी विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ाया लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वो हार गईं. लेकिन साल 2017 में भाजपा लहर में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खुद धनंजय सिंह चुनाव लड़ते हैं और हार जाते हैं. इसके बाद उपचुनाव में उनकी वापसी होती है और उनकी जीत होती दिखाई देती है.

बता दें कि धनजंय सिंह की तीन शादियां हो चुकी हैं. पहली ने शादी के 9 महीने बाद ही आत्महत्या कर ली थी, जो मामला अबतक संदिग्ध बना हुआ है. वहीं दूसरी पत्नी डॉक्टर जागृति सिंह ने उनका तलाक हो गया था, इसके बाद साल 2017 में उन्होंने एक बिजनेसमैन परिवार से आने वाली श्रीकला रेड्डी से पेरिस में शादी की.

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