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योगी सरकार का बजट 'कागजी' निकला, न तो महंगाई घटेगी, न उद्योग-धंधे बढ़ेंगे : माले

योगी सरकार का बजट कागजी निकला, न तो महंगाई घटेगी, न उद्योग-धंधे बढ़ेंगे : माले
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लखनऊ। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने योगी सरकार के सोमवार को विधानमण्डल में टैबलेट से प्रस्तुत वर्ष 2021-22 के पेपरलेस बजट की कड़ी आलोचना की है।

पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने बजट पर प्रतिक्रिया में कहा कि इससे न तो कमरतोड़ महंगाई घटेगी, न प्रदेश में कोई नया उद्योग ही लगेगा। कोरोना काल में भारी संख्या में बेरोजगार हुए लोगों और बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं के सम्मानजनक रोजगार लिए कोई योजना बजट में नहीं है। न ही गरीबों के लिए ठोस राहत पहुंचाने की व्यवस्था है। लिहाजा विकास की ठोस योजनाओं से वंचित यह बजट महज 'कागजी' खानापूर्ति है।

उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों को उम्मीद थी कि पेट्रोल-डीजल-गैस की कीमतों में जो आग लगी है, उससे प्रदेश सरकार अपने करों में कटौती कर राहत दिलाएगी। तेल के बढ़े दामों में बड़ा हिस्सा तो प्रदेश सरकार के टैक्स का है। इसके चलते महंगाई भी तेजी से बढ़ी है। लेकिन, बजट प्रस्तुत करते हुए योगी सरकार ने प्रदेशवासियों की इन कठिनाइयों के प्रति संवेदनहीनता का ही परिचय दिया है।

राज्य सचिव सुधाकर यादव ने सवाल किया कि बीमारु राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश की सेहत आखिर कब सुधरेगी। इसका कोई विजन बजट में नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश योगी सरकार से छुटकारा चाहता है। इसलिए हो सकता है कि अगले साल चुनाव बाद यह सरकार दोबारा सत्ता में न लौट पाए। इस मायने में यह योगी सरकार का आखिरी बजट हो सकता है।

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