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5जी की लांचिंग के खिलाफ जूही चावला की याचिका पर फैसला सुरक्षित

5जी की लांचिंग के खिलाफ जूही चावला की याचिका पर फैसला सुरक्षित
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म अभिनेत्री जूही चावला की 5जी को लांच करने से रोकने की मांग करने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस जेआर मिधा की बेंच ने जूही चावला की ओर से वकील दीपक खोसला की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

जूही चावला की ओर से उचित कोर्ट फीस जमा नहीं हुई है। सुनवाई के दौरान दीपक खोसला ने कहा कि कोरोना संकट की वजह से उचित कोर्ट फीस जमा नहीं कर सके हैं। उचित कोर्ट फीस दाखिल करने के लिए समय की मांग की गई। उन्होंने कहा कि जूही चावला को 25 मई को दक्षिण अफ्रीका जाना था, इसलिए उचित कोर्ट फीस जमा नहीं की जा सकी है।


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जूही चावला से पूछा कि क्या 5जी को लेकर अपनी शिकायत के साथ सरकार के पास गए थे। तब जूही की ओर से कहा गया कि नहींl इसपर कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकार के पास बिना प्रतिवेदन दिए कोर्ट आ सकते हैं। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से वकील अमित महाजन ने कहा कि याचिका में सुनवाई की जल्दबाजी की वजह नहीं बताई गई है। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये याचिका अर्थहीन है। इसमें क्षेत्राधिकार का मसला है। तब कोर्ट ने कहा कि हम मेरिट पर नहीं जा रहे हैं। हम याचिका सुनवाई योग्य है कि नहीं इस पर विचार कर रहे हैं। तब मेहता ने कहा कि ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।


अमित महाजन ने कहा कि मुझे बताया गया है कि याचिकाकर्ता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर टावरों के दुष्प्रभाव का जिक्र किया था। वह याचिका अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लंबित होने की वजह से उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट मे केस दायर करने के लिए नया रास्ता निकाला है। मेहता ने कहा कि 5जी पर कोई कानूनी रोक नहीं है। इसे शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। तब कोर्ट ने कहा कि इसमें एक शर्त है कि लोगों को प्रभावित कर सकती है। तब मेहता ने कहा कि अगर केंद्र ने गलत तरीके से अनुमति दी है तो उसका समाधान है।


वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि 5जी की लांचिंग सरकार का नीतिगत मसला है। सरकार की नीति तभी निरस्त की जा सकती है अगर वो संविधान के अनुच्छेद 14 या दूसरे प्रावधानों का उल्लंघन कर रही हो। इसके लिए रिट पिटीशन दाखिल की जा सकती है। तब खोसला ने कहा कि यह कानून की गलत व्याख्या है। जूही चावला का खुद का नुकसान हुआ है। तब कोर्ट ने कहा कि याचिका में तो ऐसा कुछ नहीं बताया गया है। आपने क्षेत्राधिकार पर भी कुछ नहीं बोला है।

याचिका में कहा गया है कि 5जी उपकरणों के रेडिएशन से लोगों के स्वास्थ्य के खराब होने की आशंका है। जूही चावला ने इस पर एक अध्ययन के हवाले से कहा है कि ये तकनीक काफी नुकसानदायक है। ऐसा कोई अध्ययन नहीं किया गया है जो ये बता सके कि 5जी तकनीक मनुष्य के लिए सुरक्षित है। ऐसे में इस तकनीक को लांच करने से रोका जाए।

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