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बड़ी लापरवाही : कोरोना टीके की दूसरी डोज लेने में स्वास्थ्य कर्मी व फ्रंटलाइन वर्कर पीछे, स्वास्थ्य मंत्रालय की बढ़ी चिंता

बड़ी लापरवाही : कोरोना टीके की दूसरी डोज लेने में स्वास्थ्य कर्मी व फ्रंटलाइन वर्कर पीछे, स्वास्थ्य मंत्रालय की बढ़ी चिंता
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नई दिल्ली। देश भर में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम के तहत अब तक 82 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों ने कोरोना टीके की पहली डोज ली है, जबकि सिर्फ 56 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों ने ही टीके की दूसरी खुराक ली है। वहीं, 85 प्रतिशत फ्रंटलाइन वर्कर ने टीके की पहली खुराक ली है और इनमें से केवल 47 प्रतिशत वर्कर ने ही टीके की दूसरी खुराक ली है। दोनों ही श्रेणियों में वैक्सीन की दूसरी खुराक के प्रति उदासीनता पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने चिंता जाहिर की है।

केन्द्र शासित प्रदेशों में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम की स्वास्थ्य मंत्रालय की वर्चुअल समीक्षा में स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने स्वास्थ्य कर्मियों औऱ फ्रंटलाइन वर्कर में दूसरी खुराक के प्रति उदासीनता को लेकर चिंता जताई और टीकाकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए है। मंत्रालय के मुताबिक पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, दिल्ली और असम सहित देश के 18 राज्यों में स्वास्थ्य कर्मियों के टीकाकरण का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से कम है। वहीं, फ्रंटलाइन वर्करों के टीकाकरण में भी बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पदुचेरी, तेलंगाना, कर्नाटक और पंजाब सहित 19 राज्य राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है।

स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने दोहराया कि वैश्विक महामारी को देखते हुए इन दोनों श्रेणियों में सौ प्रतिशत टीकाकरण बेहद जरुरी है। इसलिए इन दोनों श्रेणियों में टीके की पहली और दूसरी खुराक लगावाने के कार्य को जल्दी से जल्दी पूरा किया जाए।

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि टीकाकरण कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़नी चाहिए। नई नीति के तहत 25 प्रतिशत टीके अब निजी अस्पताल सीधे खरीद सकेंगे। लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम में निजी क्षेत्र की भागीदारी बेहद कम है।

बैठक में राज्यों को बताया गया कि कोविन प्लेटफार्म पर अब 12 भाषाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ दिव्यांगजन अपने पहचान पत्र से भी टीके के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसके साथ राज्यों को बताया कि 45 से अधिक उम्र के लोगों के लिए सीधे टीका लगवाने की सुविधा उपलब्ध की जा सकती है। अगर केन्द्र में पर्याप्त संख्या में दूसरी डोज लेने वालों के लिए टीका है तो उन केन्द्रों पर 18-44 साल के लोगों के लिए भी वॉक इन सुविधा बहाल की जा सकती है।

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