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31 अक्टूबर से प्रारंभ होगा छठ महापर्व, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि…

31 अक्टूबर से चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने वाली महिलाएं कल से लहसुन-प्याज व साग का सेवन नहीं करेंगी।

व्रत पूरा होने तक वे जमीन पर सोएंगी। 31 अक्टूबर को नहाय खाय विधान के साथ निर्जला व्रत शुरू होगा, जो 3 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त हो जाएगा।

छठ महापर्व इस तरह करें पूजा

व्रत के पहले विधान में महिलाएं लौकी व चने की सब्जी व देशी घी से बनी सामग्रियों का सेवन करेंगी। पूजा संपन्न कराने के लिए निगम ने भी गंगामुंडा तालाब के घाटों की सफाई शुरू कर दी गयी है।  छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। इस खास त्योहार की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। सुबह स्नान के बाद व्रती महिलाएं पूजा सामग्री के लिए अनाज को साफ करती हैं। इसके बाद इसे धूप में ढंककर सुखाती हैं।
इस त्योहार में अनाज को धुलने से लेकर सुखाने तक का काम काफी ध्यान से किया जाता है। इसके बाद फिर से महिलाएं स्नान करती हैं। इस व्रत में महिलाएं एकबार अनाज खाने के बाद दिन में सिर्फ खरना का प्रसाद ले सकती हैं। छठ पर्व के दूसरे दिन को खरना कहते हैं। इस दिन महिलाएं नहाए खाए के दिन सुखाए गए अनाज को चक्की में पिसवाती हैं। अनाज को मुंह में पट्टी बांधकर पीसा जाता है, ताकि अनाज की पवित्रता बनी रहे। खरना के दिन गुड़ की खीर बनती है और कच्चे चूल्हे पर रोटियां सेंकी जाती है। पूजा के बाद इस प्रसाद को व्रती महिलाएं भी खाती हैं। इस प्रसाद को ज्यादा से ज्यादा बांटा जाता है।

कार्यक्रम

  • 31 अक्टूबर- नहाय-खाय।
  • 01 नवंबर- खरना।
  • 02 नवंबर- शाम का अर्घ्य एवं 3 नवंबर- सुबह का अर्घ्य।
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