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गर्भावस्था में खून की कमी शिशु के लिए बेहद घातक : विशेषज्ञ

उत्तर प्रदेश में 52.4 फीसदी महिलाएं एनीमिया से ​ग्रस्त

लखनऊ। खून की कमी गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए घातक हो सकती है। बच्चे के मानसिक व शारीरिक विकास पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है और अत्याधिक कमी की स्थिति में उसकी मौत भी हो सकती है। प्रदेश सरकार की ओर से चलाए जा रहे एनीमया मुक्त अभियान में विशेषज्ञों का यही मानना है कि महिलाओं खासतौर पर गर्भवतियों को सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए ताकि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

क्वीन मैरी अस्पताल की प्रोफेसर डॉ. सुजाता देव के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान खून की कमी होने पर महिला के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की जिंदगी भी खतरे में आ जाती है। बच्चे का मानक अनुसार विकास नहीं होता है और उसके समय से पहले जन्म लेने और कम वजन का होने का अंदेशा बढ़ जाता है।

उन्होंने बताय़ा कि जन्म के बाद भी बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास अपेक्षाकृत वैसा नहीं हो पाता है जैसा स्वस्थ मां के गर्भ में पल रहे बच्चे का होता है। डॉ. सुजाता के मुताबिक एनेमिक मां का बच्चा भी एनेमिक होता है।

झलकारी बाई महिला अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधा वर्मा के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान एनीमिया ग्रसित होने पर डिलेवरी के समय अत्याधिक ब्लीडिंग हो सकती है। हार्ट अटैक हो सकता है जिससे महिला की मौत भी हो सकती है। उन्होंने बताया गर्भावस्था के दौरान खून की कमी होने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

गर्भावस्था के दौरान खून की जरूरत

-शुरुआती दिनों में – 2.5 मिलीग्राम प्रतिदिन
-मध्य गर्भावस्था में- 5.5 मिलीग्राम प्रतिदिन
-आठवें व नवें महीने में- 6.5 मिलीग्राम प्रतिदिन

खून की कमी होने के लक्षण

• सांस लेने में दिक्कत
• कमजोरी लगना
• शरीर में सूजन हो जाना
• शरीर खासतौर पर आंख और जबान सफेद हो जाना

क्या खाएं

• हरी पत्तेदार सब्जी, साग, शलजम, चुकंदर
• लोभिया, राजमा, नारियल, तिल के बीज
• चिकन, मटन
• लोहे की कढ़ाई में खाना बनाएं
• आखरोट, सोयाबीन, सेम, दाल, अंडे
• विटामिन सी जरूर लें

सरकार की गतिविधियां

-एनीमिया मुक्त अभियान के तहत बुधवार (15 जनवरी) से जगह–जगह टी-3 (टाक-ट्रेस-ट्रीटमेंट) कैंप लगाए जा रहे हैं जो मार्च तक चलेंगे
-18 जनवरी तक एएनम, आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को 20 व 21 जनवरी को आयोजित होने वाले टी-3 कैंप में जानकारी देंगी
-20 व 21 जनवरी को गर्भवती महिलाओं की एनीमिया की जांच के लिए टी-3 शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसमें महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच होगी
-22 से 31 जनवरी को टी-3 कैंप में चिन्हित गर्भवती महिलाओं से एएनएम, आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर आयरन की गोली खाने के बारे में जानकारी देने के साथ ही चिकित्सकों से उपचार करने की सलाह देंगी

आंकड़ों में एनीमिया

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-16) के अनुसार 6 माह से 5 वर्ष के 63.2% बच्चे एनीमिया से ग्रस्त हैं। 15-19 वर्ष की 53.7% किशोरियाँ, 15-19 वर्ष के 29.2% किशोर तथा 15-49 वर्ष की 52.4 % महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं।

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