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20 साल बाद स्कूल में आईं मां, मगर शहीद बेटे की माता के रूप में

20 साल बाद स्कूल में आईं मां, मगर शहीद बेटे की माता के रूप में
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soldier-19_19_10_2016उदयपुर। खेरवाडा ब्लॉक के परमवाडा गांव में रहने वाली 60 वर्षीय महिला वाजी बाई के लिए मंगलवार का दिन भावनाओं से भरा था। गांव के शासकीय स्कूल में वाजी बाई को बुलाया गया था। यहां कभी वो अपने बेटे लक्ष्मण लाल को लेकर आया करती थीं।

वाजी बाई के बेटे लक्ष्मण लाल बीएसएफ की 126 वीं बटालियन में कांस्टेबल थे। लाल ने 7 दिसंबर 1996 को आतंकवादियों से लड़ते हुए अपनी जान गंवा दी थी। वाजी बाई के लिए यह समय पुराने दौर में लौटने जैसा ही था। वो उसी स्कूल में आई थीं मगर यह कोई समारोह नहीं बल्कि शहीद बेटे की याद में होने वाला कार्यक्रम था।

दरअसल बीएसएफ अधिकारियों ने शहीद के परिजनों का सम्मान करने के लिए यह कदम उठाया। बीस साल बाद शहीद की मां वाजी बाई को शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही राजस्थान फ्रंटीयर, बीएसएफ हेडक्वार्टर की ओर से शिक्षा विभाग से मांग भी की गई है कि शासकीय विद्यालय का नाम शहीद लक्ष्मण लाल के नाम पर रखा जाए। इससे युवाओं में देशभक्ति का जज्बा और भी ज्यादा प्रबल होगा।

शहीद बेटे के नाम पर मिलने वाले सम्मान से मां की आंखों में आंसू के साथ ही गौरव का अहसास भी था। साल 2015 में रन ऑफ कच्छ, गुजरात में एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके अंतर्गत बीएसएफ देशभर में मातृभूमि के लिए बलिदान करने वाले सैनिकों के परिजनों को सम्मानित करेंगी। इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।

देशभर में 21 अक्टूबर को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन उन्हीं स्कूलों में होगा जहां पर कभी बॉर्डर पर ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सैनिक पढ़ा करते थे। इसके बूते इस पूरी प्रक्रिया को एक अलग ही रंग दिया जा सकेगा।

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