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समाज सेवा की शर्त पर हाईकोर्ट ने रद्द की एफआईआर

समाज सेवा की शर्त पर हाईकोर्ट ने रद्द की एफआईआर
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने दो किशोरियों से छेड़खानी करने के आरोपी पांच युवकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर सशर्त खारिज कर दी है। शर्त यह है कि वे दो दिनों तक समाज सेवा करने के साथ कानूनी सहायता सेवा के लिए 50,000 रुपए भी दान करेंगे। कोर्ट की इस शर्त पर सभी आरोपी राजी हो गए।

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आरोपियों ने याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी। इस पर जस्टिस अभय ओका और एए सैयद की खंडपीठ ने उक्त फैसला दिया। एफआईआर खारिज करते हुए खंडपीठ ने कहा, "याचिकाकर्ताओं की उम्र 19 से 22 साल के बीच है। उनके द्वारा किए गए पश्चाताप को ध्यान में रखते हुए हम एफआइआर खारिज करने को तैयार हैं। मामले में विचित्र तथ्यों की जांच-पड़ताल करने के बाद ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि कथित अपराध बड़े पैमाने पर समाज के खिलाफ है।"

पांच युवकों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता किशोरी की मां ने हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि दोनों पक्ष एक समझौते पर पहुंचे हैं और मामले को सुलझाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि उनकी बेटी कोर्ट और पुलिस का चक्कर लगाए। आरोपियों ने भी अपने कुकृत्य पर पश्चाताप किया है। युवकों पर 25 सितंबर को ठाणे जिले के बदलापुर में किशोरी के साथ छेड़खानी करने का आरोप है।

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