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विधानसभा चुनाव 2017: हरीश रावत बोले, हमने जीता है लोगों का भरोसा

विधानसभा चुनाव 2017: हरीश रावत बोले, हमने जीता है लोगों का भरोसा
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10_02_2017-harishrawatindoonदेहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए यह चुनाव दोनों अनुभव एक साथ लेकर आया है। प्रदेश में पार्टी के लिए वह पर्याय बन चुके हैं और किसी भी आंतरिक चुनौती को लेकर आश्वस्त हैं, लेकिन यह भी तय है कि पांव फिसला तो फिर जिम्मेदारी साझा करने को भी आसपास कोई नहीं है। शायद उन्हें इसी अहसास से ताकत मिल रही है और एक एक वक्त का हिसाब रख रहे हैं।

एक रात पहले ढाई बजे तक मीटिंग करने के बाद सुबह नैनीताल के बिरला कालेज हेलीपैड पर मिलते हैं तो नमस्कार के बाद बिना रुके कहते हैं, 'सवाल पूछिए।' लगभग 20 मिनट तक गाड़ी में बातचीत के बाद वह नियत स्थान पर उतरने से पहले भी फिर से कहते हैं, 'और कोई सवाल?' दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख आशुतोष झा के साथ बेबाक बातचीत का एक अंश।

-पिछले दिनों में कांग्रेस में जो कुछ हुआ, पार्टी के अधिकतर दिग्गजों ने आपके खिलाफ अविश्वास जताया। उसके बाद चुनाव में जीत को लेकर कितने विश्वस्त हैं?

-कौन कितने बड़े दिग्गज हैं, यह तो चुनाव नतीजा बताएगा और किसने क्यों अविश्वास जताया, यह लोग जानते हैं। जिसे कांग्रेस ने सब कुछ दिया, उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए पार्टी को धोखा दिया। रही बात मेरे विश्वस्त होने की, तो उसका कारण मेरा कामकाज भी है और भाजपा का आचरण भी। आप आंकड़े उठाकर देख लीजिए कि पिछले दो ढाई वर्षों में प्रदेश कहां खड़ा है। आप उत्तराखंड घूमकर देख लीजिए कि सड़कों पर कितना काम हो रहा है। लोगों के रोजगार के लिए रास्ते तलाशे जा रहे हैं। स्थानीय उपज पर सरकार कितने ज्यादा पैसे दे रही है। दूसरी तरफ भाजपा ने क्या किया? आपदा पर भी केवल राजनीति की। बाद में रावत सरकार को भी धराशायी करने की कोशिश हुई। आज वे लोग उनके साथ खड़े हैं। उनका बचाव करना भाजपा के लिए बहुत मुश्किल होगा।

-यानी आपको अपनी जीत का विश्वास एंटी भाजपा वोट से है?

-मैंने ऐसा नहीं कहा। मैंने जमीन पर काम किया है और इसीलिए सत्ता में होने के बावजूद उत्तराखंड की जनता कांग्रेस के खिलाफ नहीं बोल रही है। जनता ने देखा है कि तुलनात्मक दृष्टि से पिछले दो ढाई वर्षों में क्या हुआ है। मेरे विश्वास का कारण जनता का भरोसा है।

-मगर कहा तो यह भी जा रहा है कि आप एक चतुर राजनीतिज्ञ हैं और आपको विरोधियों से मुक्ति पाने का रास्ता मिल गया। चुनाव में भी आप उन कांग्रेस उम्मीदवारों से मुक्ति पा सकते हैं, जो ऊपर से थोपे गए हैं?

-(शांत रहते हुए) ऐसा बिल्कुल नहीं है। मैं अपने सभी प्रत्याशियों की जीत के लिए जी जान से जुटा हूं। सभी कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। रही बात कांग्रेस छोड़कर जाने वालों की, तो किसी से छुपा नहीं है कि भाजपा की भूमिका क्या रही थी। भाजपा के लिए अच्छा होता कि वह इंतजार करती।

-इस चुनाव में आपको भाजपा की ओर से सबसे बड़ी चुनौती क्या लग रही है?

-भाजपा निर्दलीयों को खड़ा कर रही है जो हमारे वोट काट सकें। प्रदेश की लगभग सभी सीटों पर यह हो रहा है।

-आपने बेरोजगारी भत्ता का चुनावी ऐलान किया है जबकि आपके आने के बाद ही ऐसी एक योजना बंद कर दी गई थी। लोग आप पर कैसे भरोसा करें?

-हमने सकारात्मक तरीका ढूंढा था। लोगों को स्वरोजगार के लिए खड़ा करने की कोशिश की थी। फंड उसमें डाइवर्ट किया गया था। आगे भी जो भत्ता दिया जाएगा, वह उन लोगों के लिए होगा जो प्रशिक्षण के बाद भी कुछ कारणों से बेरोजगार होंगे।

-आपको शुक्रवार नमाज के लिए 90 मिनट का ब्रेक घोषित करने का फैसला कितना उचित लगता है?

-यह केवल मुस्लिमों के लिए नहीं है। धार्मिक उत्सव के लिए तो लोग छुïट्टी चाहते ही हैं। मेरा प्रस्ताव था कि नमाज के लिए लंच ब्रेक बढ़ा दिया जाना चाहिए।

-प्रदेश भाजपा में आपको कौन सबसे सशक्त चेहरा लगता है?

-(थोड़ी देर सोचने के बाद) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा तो उनके पास कोई चेहरा नहीं है। प्रदेश में ऐसा कोई नहीं जिस पर भाजपा नेतृत्व को भरोसा रहा हो।

-मोदी के जादू से आप कितने आशंकित हैं?

-वह प्रधानमंत्री हैं और मैं एक छोटे से राज्य का मुख्यमंत्री। हम दोनों में तो कोई तुलना नहीं है। भाजपा चुनाव प्रचार में उन्हें प्रोजेक्ट कर प्रधानमंत्री का अपमान कर रही है लेकिन उनके पास भी उत्तराखंड में दिखाने को कुछ नहीं है। मैं ने शुरुआत में ही बात कही कि आपदा के बाद भी उन्होंने उत्तराखंड के लिए आखिरकार क्या किया। नोटबंदी ने लोगों को परेशान ही किया है। वैसे भी यह राज्य का चुनाव है और उनके पास रावत के मुकाबले दिखाने को कोई चेहरा नहीं है।

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