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नोटबंदी के बाद यहां लोग कैश की किल्लत दूर करने धड़ल्ले से करवा रहे नसबंदी

नोटबंदी के बाद यहां लोग कैश की किल्लत दूर करने धड़ल्ले से करवा रहे नसबंदी
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sterilization_27_11_2016लखनऊ। देश में केंद्र सरकार ने 8 नवंबर को नोटबंदी का ऐलान किया था जिसके बाद से ही आम जनता लगातार नकदी की कमी से जूझ रही है। इससे निपटने के लिए हर व्‍यक्ति लाइन में लगा है तो कुछ ने अजीब रास्‍ते अपनाए हैं। ऐसा ही रास्‍ता यूपी के लोग अपना रहे हैं और कैश की किल्‍लत को दूर करने के लिए नसबंदी करवाने में लगे हैं।टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार यूपी में नोटबंदी के बाद नसबंदी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। यूपी में नसबंदी करवाने वाले पुरुषों को 2 हजार रुपए वहीं महिलाओं को 1400 रुपए दिए जाते हैं। खबर के अनुसार अलीगढ़ और आगरा में इस महीने नसबंदी के मामले में अनअपेक्षित बढ़ोतरी देखी गई है।उदाहरण के लिए अलीगढ़ में नवंबर महीने में ही दोगुना नसबंदी के मामले सामने आए हैं। पिछले साल इस महीने जहां नसबंदी के 92 मामले सामने आए थे वहीं इस साल यह दोगुना होकर 176 हो गए हैं जबकि महीना खत्‍म होने में अब भी 4 दिन बाकी हैं।आगरा की बात करें तो वहां पिछले साल जहां 450 नसबंदी हुई थीं वहीं इस साल नवंबर माह में अब तक 908 मामले सामने आए हैं जिनमें से 904 तो महिलाएं हैं और 4 पुरुष।नसबंदी करवाने वालों में एक पुरण शर्मा भी हैं जो अलीगढ़ में रहते हैं। उनकी पत्‍नी दिव्‍यांग हैं और वो नसबंदी के लिए नहीं जा पाई। शर्मा को इसके बाद 2 हजार रुपए मिले हैं जो उन्‍हें तंगी के दिनों में राहत दे सकेंगे। हालांकि स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों का मानना है कि नसबंदी के मामलों में इतनी बढ़ोतरी बढ़ती जागरूकता का नतीजा है जबकि शर्मा का दावा है कि उन्‍हें इस तरह की किसी कैंपेन की जानकारी नहीं है और वो सिर्फ पैसे के लिए नसबंदी करवाने आए थे।नेहरउला के रहने वाले शर्मा के अनुसार उन्‍हें एक स्‍थानीय आशा कार्यकर्ता ने बताया था कि अगर वो नसबंदी करवा लेते हैं तो उन्‍हें पैसा‍ मिलेगा। मुझे पैसे की बेहद जरूरत थी ताकि घर चला सकूं। मैं गांव में किसी को नहीं जानता जो मुझे मदद कर सकता था।शर्मा के अनुसार आशा दीदी ने बताया कि नसंबदी से पैसे मिलेंगे जिसके बाद मैंने नसबंदी करवाने का निर्णय लिया। मैं अपनी पत्‍नी के साथ अस्‍पताल गया जहां डॉक्‍टरों ने पत्‍नी के दिव्‍यांग होने की वजह से उसकी नसबंदी से इन्‍कार कर दिया था। जो पैसा मिला है उससे घर में कुछ खाने का सामान ला पऊंगा।खेर में सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र की जिम्‍मेदारी संभाल रहे डॉ. राहुल शर्मा बताते हैं कि पुरण शर्मा इसलिए नसबंदी करवाने आए थे कि उन्‍हें नकदी की जरूरत थी। उनका परिवार पूरा था और उन्‍हें कोई दिक्‍कत नहीं थी।अगरा के एडिशनल चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. शेर सिंह के अनुसार इस साल कुल 2272 लोगों ने नसबंदी करवाई है जिसमें से सिर्फ नवंबर में ही नसबंदी के 913 केस सामने आए हैं। उनका दावा है कि ठंड में यह संख्‍या बढ़ती है क्‍योंकि लोगों का मानना है इस मौसम में इन्‍फेक्‍शन कम होता है।

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