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नारद जयंती 2020: संवाददाता देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह आज … पौराणिक कथा

धर्म शास्त्र और ग्रंथों के मुताबिक ज्येष्ठ महीने में नारद जयंती मनाई जाती है। इस साल नारद जयंती आज 1 मई को  है। शास्त्रों के अनुसार नारद मुनि ब्रह्मा के सात पुत्रों में से एक है। नारद ऋषि ने कठिन तपस्या करके देवार्षि की उपाधि हासिल की है। ये भगवान विष्णु के प्रिय भक्तों में से एक है। शास्त्रों में देवार्षि नारद को भगवान को मन भी कहा गया है।

इधर-उधर विचरण करने वाले व्यक्तित्व की अनुभूति होती है। नारद इधर-उधर घूमते हुए संवाद-संकलन का कार्य करते हैं। इस प्रकार एक घुमक्कड़, किंतु सही और सक्रिय-सार्थक संवाददाता की भूमिका निभाते हैं और अधिक स्पष्ट शब्दों में कहूं तो यह कि देवर्षि ही दिव्य प्रथम व दिव्य पत्रकार कहलाते है।

पहले संपादक

महर्षि वेदव्यास विश्व के पहले संपादक हैं क्योंकि उन्होंने वेदों का संपादन करके यह निश्चित किया कि कौन-सा मंत्र किस वेद में जाएगा अर्थात्‌ ऋग्वेद में कौन-से मंत्र होंगे और यजुर्वेद में कौन से, सामवेद में कौन से मंत्र होंगे तथा अर्थर्ववेद में कौन से ? वेदों के श्रेणीकरण और सूचीकरण का कार्य भी वेदव्यास ने किया और वेदों के संपादन का यह कार्य महाभारत के लेखन से भी अधिक कठिन और महत्वपूर्ण था।

देवर्षि नारद दुनिया के प्रथम पत्रकार या पहले संवाददाता हैं, क्योंकि देवर्षि नारद ने इस लोक से उस लोक में परिक्रमा करते हुए संवादों के आदान-प्रदान द्वारा पत्रकारिता का प्रारंभ किया। इस प्रकार देवर्षि नारद पत्रकारिता के प्रथम पुरुष/पुरोधा पुरुष/पितृ पुरुष हैं।

जो इधर से उधर घूमते हैं तो संवाद का सेतु ही बनाते हैं। जब सेतु बनाया जाता है तो दो बिंदुओं या दो सिरों को मिलाने का कार्य किया जाता है। दरअसल देवर्षि नारद भी इधर और उधर के दो बिंदुओं के बीच संवाद का सेतु स्थापित करने के लिए संवाददाता का कार्य करते हैं।

इस प्रकार नारद संवाद का सेतु जोड़ने का कार्य करते हैं तोड़ने का नहीं। परंतु चूंकि अपने ही पिता ब्रह्मा के शाप के वशीभूत (देवर्षि नारद को ब्रह्मा का मानस-पुत्र माना जाता है। ब्रह्मा के कार्य में पैदा होते ही नारद ने कुछ बाधा उपस्थित की। अतः उन्होंने नारद को एक स्थान पर स्थित न रहकर घूमते रहने का शाप दे दिया।

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