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चुनावी समर के कई योद्धाओं की पतवार पत्नियों के हाथ

चुनावी समर के कई योद्धाओं की पतवार पत्नियों के हाथ
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09_02_2017-swati-singhलखनऊ : मुगल सम्राट अकबर से युद्ध के दौरान जंगल में भटक रहे महाराणा प्रताप जब संधि पत्र लिखने बैठे तब उनकी पत्नी ने हाथ पकड़कर बोला था 'थक गया समर से तो रक्षा का भार मुझे दे दे, मैं चंडी सी बन जाऊंगी अपनी तलवार मुझे दे दे।' मौजूदा समय में सियासत के कई योद्धाओं के न होने पर उनकी पत्नियों ने मैदान संभाल लिया है। कई मौजूद रहकर भी अपनी पतवार पत्नियों के हाथ में थमा चुके हैं। ऐसी उम्मीदवारों के चलते उत्तर प्रदेश के चुनावी महासमर का रोमांच बढ़ता जा रहा है।

पत्नियों का बड़ा सहारा

समाजवादी सरकार में मंत्री रहे राजा महेंद्र अरिदमन सिंह को बाह और उनकी पत्नी रानी पक्षालिका सिंह को सपा ने खैरागढ़ से टिकट दिया था लेकिन, समाजवादी कुनबे के कलह में अरिदमन को लगा कि जहाज डूब रहा है तो वह सबसे पहले उतर गये। भाजपा ने सिर्फ एक टिकट देने की बात की तो उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा समेट कर अपनी बाह सीट पत्नी को सौंप दी। अब उनकी पतवार पक्षालिका के हाथों में है। पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी कानूनी शिकंजे में फंसे तो उनकी सीट हंडिया पर पत्नी प्रमिला धर त्रिपाठी अपना दल की उम्मीदवार हो गई हैं। इसी तरह उदयभान करवरिया की पत्नी नीलम करवरिया को इलाहाबाद जिले की मेजा सीट पर भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। मायावती पर अभद्र टिप्पणी के चलते भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष पद से बर्खास्त किए गयए दयाशंकर सिंह की सियासत अब पत्नी स्वाति सिंह के भरोसे है। भाजपा ने महिला मोर्चा की कमान तो स्वाति को सौंपी ही, उन्हें राजधानी की सरोजनीनगर सीट से उम्मीदवार बना दिया है।

साम्राज्य विस्तार की मुहिम

अमेठी में भाजपा ने गरिमा सिंह और कांग्रेस ने अमिता सिंह को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस सांसद संजय सिंह की पहली और दूसरी पत्नी के बीच यह जंग है लेकिन, संजय की प्रतिष्ठा अमिता के साथ लगी है। कानूनी दांव-पेंच में फंसने के बाद बहराइच के नानपारा में विधायक रहे दिलीप वर्मा ने अपनी पत्नी माधुरी को आगे किया और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतीं। इस बार उन्हें भाजपा ने मौका दिया है। भाजपा में आने के बाद संसद में पहुंचे कौशल किशोर अपने साम्राज्य को विस्तार देने के लिए इस बार अपनी पत्नी जय देवी को मलिहाबाद से भाजपा का टिकट दिलवाने में कामयाब हुए हैं। सपा सरकार के मंत्री रहे वकार शाह की बहराइच सीट पर उनकी पत्नी पूर्व सांसद रुआब सइदा इस बार सपा के टिकट पर किस्मत आजमा रही हैं।

पति की शहादत का वास्ता

बाहुबलियों ने 2005 में गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद के भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी तो उनकी पत्नी अलका राय उपचुनाव में रणक्षेत्र में कूद पड़ी। जनादेश उनके पक्ष में गया लेकिन, बाद के चुनाव में वह हार गयीं। अबकी फिर भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है और वह अपने पति की शहादत का वास्ता देकर मैदान में मुकाबिल हैं। इलाहाबाद के प्रतापपुर में बिजमा यादव अपने विधायक पति जवाहर पंडित की हत्या के बाद कई बार सदन में पहुंची लेकिन, आज भी पति की मौत ही उनका सबसे बड़ा मुद्दा है। बिजमा सपा की उम्मीदवार हैं। इलाहाबाद पश्चिम में विधायक पति राजू पाल की हत्या के बाद पूजा पाल ने मोर्चा संभाला और वह विधानसभा में पहुंची और इस बार फिर बसपा के टिकट पर मैदान में हैं। पति कांग्रेसी नेता अभयवीर सिंह की हत्या के बाद इटावा की सरिता भदौरिया ने हुंकार भरी और अबकी भाजपा ने सरिता को इटावा से उम्मीदवार बनाया है। अंबेडकरनगर जिले के टांडा में हिन्दू नेता राम बाबू गुप्ता की हत्या के बाद उनकी पत्नी संजू देवी ने हत्यारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राम बाबू के भतीजे की भी हत्या हुई। भाजपा इस लड़ाई में गुप्ता परिवार के साथ रही और अब संजू को टांडा से उम्मीदवार बना दिया है। टांडा के विधायक के खिलाफ पुलिस थानों में लड़ रही संजू सीधे जनता की अदालत में हैं।

बेपटरी सियासत

रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रहे मुन्ना सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी शोभा सिंह भाजपा में शामिल हो गयीं। भाजपा ने शोभा का मान रखते हुए उन्हें बीकापुर से उम्मीदवार बना दिया है। शोभा सिंह को भले टिकट मिल गया लेकिन, सहारनपुर के देवबंद में सपा सरकार के मंत्री रहे राजेन्द्र सिंह राणा की पत्नी मीरा राणा की सियासत बेपटरी हो गयी है। राजेन्द्र राणा के निधन के बाद उपचुनाव में सपा ने मीरा को मौका दिया लेकिन, पराजय मिली। अबकी सपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया है।

बेटों को सौंपी पति की विरासत

कई महिला नेताओं ने इस बार पति की विरासत बेटों को सौंप दी है। इनमें गोंडा जिले के मेहनौन की विधायक और पूर्व मंत्री घनश्याम शुक्ल की पत्नी नंदिता शुक्ला ने अपने बेटे राहुल शुक्ल, गोरखपुर के पिपराइच की विधायक और पूर्व मंत्री जमुना निषाद की पत्नी राजमती निषाद ने अपने बेटे अमरेन्द्र निषाद, गाजीपुर के जंगीपुर की विधायक और पूर्व मंत्री कैलाश यादव की पत्नी किसमतिया देवी ने वीरेन्द्र यादव और शोहरतगढ़ की विधायक और पूर्व मंत्री दिनेश सिंह की पत्नी लालमुनी सिंह ने अपने पुत्र उग्रसेन सिंह के लिए विधानसभा चुनाव मैदान से किनारा कर लिया है।

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