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काश कहीं से 2000 का इंतजाम हो जाता तो काम चल जाता

काश कहीं से 2000 का इंतजाम हो जाता तो काम चल जाता
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लखीमपुर(देव श्रीवास्तव): आज मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी को पूरा एक माह बीत चुका है।इस एक माह के दौरान लोगो को में बहुत सी समस्या उत्पन्न हुई। लोग दिन-दिन भर बैंको में लाइनों में लगे रहने के बावजूद भी कही-कही लोगो ने मोदी सरकार के इस फैसले की सराहना भी की। तो इस नोटबंदी के चलते लोगो को तमाम प्रकार की मुसिबतों को भी झेलना पड़ा।

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बैंक में कैश की किल्लत से किसी को वेतन नहीं मिल पाया। तो बैको में पेंशनर्स भी सुबह से शाम तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे और थकहार कर वापस घर लौट गए। कोषागार से पेंशनर्स व राजकीय कर्मचारियों का वेतन तो उनके खातों में भेज दिया गया है। मगर कैश न होने से वह बेकार ही है। हालांकि सभी बैंको ने पर्याप्त धनराशि अपनी विभिन्न शाखाओं को भेज दी गई थी। लेकिन कुछ बैको में अभी तक धनराशि उपलब्ध नही हो पाई । इसी के साथ स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, जिला सहकारी बैंक और इलाहाबाद बैंक के एटीएम के बाहर लंबी लाइनें अभी भी देखने को मिल रही है। यह हाल पूरे जिले का है। हर जगह लोग पैसे के लिये लाइनों में दिख रहे है।वहीं कुछ खाताधारकों ने बताया की सप्ताह में मात्र एक दिन ही एक-एक हजार रुपये का भुगतान किया गया जोकि नाकाफी है।

जारी है विपक्षियों का वार

मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी के बाद विपक्षियों द्वारा नोटबंदी की खिलाफत आज भी जारी है। उन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले को बिलकुल गलत बताते है। और रोज आना नोटबंदी के खिलाफ सड़को पर नारे बाजी और प्रदर्शन करते नजर आते है।

जनता है खुश

वहीं व्यापारी दलबीर सिंह का कहना है कि "मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी के फैसले से वे बहुत खुश है। इससे सरकारी मशीनरी में भी काफी सुधार आएगा। हालांकि इससे आम जनमानस को कुछ तकलीफ हुई है।"

हैं समस्याएं भी

रुपए के जुगाड़ में बैंक पहुंचे विश्व मोहन अवस्थी ने बताया कि "दो हजार रुपए के लिए यह 3 दिन से बैंक का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन भीड़ है कि खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में उनके सामने घर चलाने की बड़ी समस्या सामने आ गई है।"

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