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उत्तराखंड में हिमस्खलन होने से मची तबाही, आंधी से एक की मौत

उत्तराखंड में हिमस्खलन होने से मची तबाही, आंधी से एक की मौत
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बरसात से पहले ही बारिश उत्तराखंड की परीक्षा लेने लगी है। मौसम के मिजाज को देखते हुए अगले 14 घंटे का अलर्ट जारी किया गया है। उच्च हिमालय में भारी बर्फबारी और आंधी ने दो जानें ले लीं। इनमे से एक की मौत पिथौरागढ़ और दूसरे की उत्तरकाशी जिले में हुई है। दूसरी ओर देर रात से ही चार धाम में रुक-रुक कर बर्फबारी तो निचले इलाकों में बारिश जारी है।

धामों में करीब आधा फुट हिमपात के समाचार हैं। बताया जा रहा है कि बर्फबारी से केदारनाथ में चार दर्जन से ज्यादा टेंट भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालात को देखते हुए केदारनाथ जाने वाले यात्रियों को सोनप्रयाग में रोका गया है, वहीं बदरीनाथ के पास लामबगड़ में भूस्खलन को देखते हुए वाहनों को आगे नहीं जाने दिया गया। हालांकि शाम को यातायात सुचारु हो गया। उत्तरकाशी जिले में गोमुख जाने वाले दल को भी गंगोत्री में ही रोक लिया। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा एहतियात के तहत यह कदम उठाया गया है। ऋषिकेश में गंगा में राफ्टिंग भी नहीं की गई।

उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री नेशनल पार्क में बड़ा हादसा टल गया। ट्रैकिंग के बाद मंगलवार की दोपहर केदारताल से गंगोत्री लौट रहे पर्यटक छह किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाए थे कि एकाएक हिमस्खलन हो गया। दल में गुजरात, दिल्ली और गुरुग्राम के 25 पर्यटकों चार गाइड तथा छह पोर्टर शामिल थे। यह दल छह मई को ट्रैकिंग पर रवाना हुआ था। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि हिमस्खलन के वक्त सामान लेकर आगे चल रहे पोर्टर बर्फ में दब गए। पीछे से आ रहे पोर्टर और पर्यटकों ने किसी तरह एक तो बचा लिया, लेकिन दूसरे का पता नहीं चल पाया है।

लापता पोर्टर नेपाल का रहने वाला है। सूचना मिलने के बाद एसडीआरएफ, गंगोत्री नेशनल पार्क व पुलिस की टीम को रवाना किया गया है। डीएम ने बताया कि सभी पर्यटक सुरक्षित है। एक अन्य घटना में सोमवार को पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित जिंबा गांव के आनंद सिंह पत्नी के साथ जंगल की ओर गए थे। इस बीच तेज हवा के कारण उनका संतुलन बिगड़ा और वह खाई में जा गिरे। किसी तरह उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

दूसरी ओर सोमवार आधी रात के बाद आंधी ने उत्तराखंड में दस्तक दी। हालांकि इसका असर मैदानी इलाकों तक ही सिमटा रहा। कई जगह पेड़ उखडऩे के साथ ही बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। इससे इन इलाकों के कई गांव अंधेरे में डूब गए। मौसम विज्ञानियों के अनुसार हवा की रफ्तार करीब 75 किमी प्रतिघंटा थी।

गृहमंत्री ने की सीएम से ली जानकारी

मौसम के तेवरों को देखते हुए केंद्र भी उत्तराखंड के हालात पर नजर रखे हुए है। मंगलवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से फोन पर आवश्यक जानकारी ली और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र हर तरह की मदद को तैयार है।

मई में 13 साल बाद गंगोत्री-यमुनोत्री में हिमपात

केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में सोमवार रात से ही रुक-रुक कर हिमपात हो रहा है। बदरीनाथ में मई में यह दूसरा हिमपात है। गौरतलब है कि यहां मई में वर्ष 2006 में बर्फबारी हुई थी। गंगोत्री और यमुनोत्री में भी 13 साल बाद ऐसा मौका आया है, जब मई में बर्फ गिरी हो। इससे पहले वर्ष 2005 में हिमपात हुआ था। यात्री बर्फबारी का लुत्फ उठा रहे हैं।

केदारनाथ के लिए हेली सेवा रोकी

मौसम के मद्देनजर मंगलवार को केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर की उड़ानें रोक दी गईं। सुरक्षा के दृष्टिगत यात्रियों को भी सुबह नौ बजे के बाद सोनप्रयाग में ही रुकने को कहा गया। हालांकि सुबह छह बजे से नौ बजे तक करीब दो हजार यात्रियों को केदारनाथ रवाना कर दिया गया था। ये यात्री भी विभिन्न पड़ावों पर रुके रहे। यात्रियों को लाउडस्पीकर लगाकर सचेत किया जा रहा है। बारिश के कारण बदरीनाथ और यमुनोत्री हाईवे पर भूस्खलन हो रहा है। यमुनोत्री हाईवे पर यातायात चार घंटे बाधित रहा, वहीं बदरीनाथ में लामबगड़ के के पास करीब आठ घंटे मार्ग बंद रहा।

एनडीआरएफ- एसडीएआरफ पूरी तरह तैयार

खराब मौसम को देखते हुए शासन ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को भी अलर्ट पर रखा गया है। सोमवार देर रात आई आंधी से हुए नुकसान को लेकर शासन ने प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। मुख्यमंत्री स्वयं स्थिति पर नजर रखे हुए हैं

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