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आखिरकार टूट गया अभिभावकों के सब्र का बांध

देव श्रीवास्तव

लखीमपुर-खीरी:  जिस स्कूल में अपने बच्चे का एडमिशन कराया है वहां हर साल एडमीशन फीस देनी पड़े। दो बच्चों का एडमिशन कराने पर पहले छूट का लालच दिया जाए और बाद में मुकर जाए। कम्प्यूटर एक विषय के तौर पर पढ़ाए जाने के बावजूद 600 रुपए की अतिरिक्त फीस वसूली जाए। 15-20 रुपए में तैयार होने वाली डायरी के लिए 200 रुपए लिए जाए। जरा सोचिए ऐसे में आपकी हालत क्या होगी? मजबूर होकर आप किस हद तक जा सकते हैं? शायद आप हर वो कदम उठाएंगे जो आपके भविष्य के लिए जरूरी होगा। अब सोचिए कि जो वाकई इस परिस्थिति को झेल रहा हो उसकी दशा क्या होगी। जिला मुख्यालय में एक स्कूल की ऐसी ही मनमानी के खिलाफ अभिभावकों के सब्र का बांध टूट गया और वह अपने बच्चों समेत सड़क पर बैठ गए। 

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बीपीएस स्कूल का मामला

मेला मैदान के पास स्थित बीपीएस स्कूल में सोमवार को तमाम अभिभावक भड़क गए। बच्चों की फीस और कोर्स सहित डायरी और बेल्ट की खरीद में भारी कमीशनबाजी का आरोप लगाया। जब स्कूल प्रबंधन ने मनमानी जारी रखी तो अभिभावक स्कूल से बाहर निकल आए और सड़क पर बैठ गए। रोड जाम कर हंगामा शुरू कर दिया। अभिभावकों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि विद्यालय में मनमाने तरीके से फीस वसूली जाती है। स्कूलों में केवल प्रवेश के समय ही एडमीशन फीस ली जाती है। इसके बाद हर साल तयशुदा फीस वसूली जाती है। लेकिन इस स्कूल में हर साल एडमीशन फीस ली जाती है।  कोर्स व ड्रेस भी शहर की खास दुकान से लेना पड़ता है। अभिभावकों ने बताया कि हाल ही में बच्चों को स्कूल की ओर से डायरी दी गई है। दोयम दर्जे के पेज वाली डायरी की कीमत स्कूल प्रबंधन ने दो सौ रुपए लगाई है। यही नहीं अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में कम्प्यूटर एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। इस साल कम्प्यूटर के नाम पर 600 रुपए की फीस अलग से लगा दी गई है। इतनी लूट में कौन अपने बच्चों को पढ़ा-लिखा पाएगा। 

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स्कूल की मनमानी के खिलाफ उतरे सड़क पर 

अभिभावकों ने रोड जाम कर घंटों विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोगों ने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली की जांच कराने और उचित कार्रवाई की मांग की। करीब एक-डेढ़ घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। वहीं इस बड़े मसले पर लोगों को समझाने के लिए नायब तहसीलदार को भेजा गया। काफी देर बातचीत के बाद कार्रवाई का आश्वासन  दिया|

शिक्षा विभाग का मसला निबटाने पहुंचे तहसील अधिकारी

अभिभावकों को उम्मीद थी कि उनके व उनके बच्चों की आवाज बीएसए और डीआईओएस के कानों तक पहुंचेंगे। वह मौके पर आएंगे और उनकी बात समझकर उन्हें न्याय दिलाएंगे। लेकिन तपती धूप में एक-डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन करने के बाद प्रशासन ने भेजा तो नायब तहसीलदार को। इसके बाद सिर्फ औपचारिकताओं का दौर चला।

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