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पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने हिला दी संसद, पहली बार खुलकर बोले

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने हिला दी संसद, पहली बार खुलकर बोले
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नई दिल्ली : नोटबंदी पर संसद में मचे संग्राम के बीच आज देश के पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने मामले पर अपने विचार रखे।

मनमोहन ने कहा कि हम नोटबंदी के खिलाफ नहीं है। लेकिन इससे आम आदमी को तकलीफ हुई है।img_20161124121536उन्होंने कहा कि हम सरकार के रूख से पूरी तरह असहमत हैं।

मनमोहन सिंह ने कहा कि नोटबंदी की वजह से अब तक 60-65 लोगों की मौत हो चुकी हैं। उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा। पूर्व पीएम ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि नोटबंदी की वजह से करंसी सिस्टम से लोगों का भरोसा उठ गया है।

देश की अर्थव्यवस्था को भी काफी नुकसान पहुंचा है। नोटबैन की वजह से देश में छोटे उद्योग खत्म हो गए हैं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी को लागू करने में पीएमओ पूरी तरह से फेल रहा है।

इससे पहले बुधवार को लोकसभा में नोट बंदी पर सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के दूर होने की थोड़ी संभावना तब नजर आई जब प्रश्नकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में दिखे। हालांकि कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य कार्यस्थगन प्रस्ताव स्वीकार करने की मांग को ले कर वेल में पहुंच कर नारेबाजी करने लगे।

इस दौरान पीएम मोदी चुपचाप हंगामे को देखते सुनते रहे और करीब 10 मिनट तक सदन में रहने के बाद बाहर निकल गए। हंगामे और नारेबाजी के बीच ही सूचना प्रसारण मंत्री वैंकेया नायडू की विपक्ष से तीखी नोकझोंक हुई।

नायडू ने कहा कि विपक्ष ने हंगामा करने को अपनी आदत बना लिया है। जवाब में विपक्ष ने सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया।

प्रधानमंत्री कार्यवाही शुरू होने से कुछ पल पहले ही सदन में पहुंचे। इसी बीच संसद भवन परिसर में नोट बंदी के फैसले के खिलाफ एकजुट प्रदर्शन करने वाले विपक्षी सदस्यों ने कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा करना शुरू कर दिया। विपक्ष के कई नेताओं ने तत्काल प्रधानमंत्री के बयान की मांग की। मगर प्रधानमंत्री चुपचाप बैठे रहे और हंगामे का नजारा लेते रहे।

इसी बीच संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है। सरकार खुद इस फैसले के सभी पहलुओं पर चर्चा करना चाहती है। जबकि विपक्ष ऐसा नहीं चाहता। इस पर कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खडग़े ने सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो कार्यस्थगन प्रस्ताव स्वीकार क्यों नहीं कर रही?

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