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जान तो लीजिये कि CBI संवैधानिक है या गैरसंवैधानिक… ये है पूरा सच…

आजकल सीबीआई बनाम पुलिस या केंद्र बनाम राज्य या सत्ता बनाम सत्ता या नागरिक बनाम व्यवस्था आप जिस भी रूप में इस संकट को देखना चाहें आप देख सकते हैं।

लेकिन आवश्यक है की पहले समस्या को जान लें फिर समस्या की जड़ में छुपे समाधान को पहचान लें। सुचना ही शक्ति है और सही प्रयोग व्यस्था परिवर्तन के यज्ञ में श्रेष्ठ आहुति का काम करेगा।

आइये समझते हैं की सीबीआई है क्या ?

1 . सीबीआई है क्या ?

ये बात १ अप्रैल 1963 की है जब सरकार को आवश्यकता प्रतीत हुई की एक ऐसी जांच एजेंसी होनी चाहिए जो आपराधिक मामलों की सुचना एकत्रित कर उसपर रिसर्च कर सके और आवश्यकता पादन पर इंटेलिजेंस उपलब्ध करवा सके। इसके लिए गृह मंत्रालय ने एक विभागीय आदेश पारित किया जो की भारत सरकार के तत्कालीन सचिव वी. विश्वनाथन द्वारा कार्यकारी आदेश या कार्य कारी रेसोलुशन के रूप में पारित किया गया जिसकी संख्या है

2. क्या सीबीआई पुलिस है ?

चूंकि सीबीआई दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 1946 का हिस्सा नहीं है इसलिए वैधानिक रूप से यह पुलिस का हिस्सा नहीं है।

3. यदि सीबीआई पुलिस नहीं है तब वह पुलिस की भूमिका क्यों निभाती है ?
ये समस्या 56 साल पुराणी है। काफी लम्बे समय से सीबीआई पुलिस की भूमिका निभाती आ रही है क्यूंकि सीबीआई का कहना है की वह दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के अंतर्गत आती है और क्रिमिनल प्रोसीजर कोड का अनुपालन कर सकती है जो की गलत है। दरअसल पुलिस राज्य सरकार के अधिकार के अंतर्गत आती है और केंद्र सरकार किसी भी प्रकार की जांच करने के लिए राज्य सरकार को कह सकती है।

4. क्या सीबीआई एक जांच एजेंसी है ?

सीबीआई एक जांच एजेंसी है लेकिन उस तरह से नहीं जिस तरह का व्यवहार वह करती है। सीबीआई का काम है आपराधिक मामलों का अध्ययन करना और उससे जुडी सूचनाएं केंद्र को उपलब्ध करवाना। ऐसा संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने सदन में अपने भाषण के दौरान स्पष्टीकरण देते हुए कहा था की सीबीआई का अर्थ है सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इंटेलिजेंस या सेंट्रल ब्यूरो आफ इनफार्मेशन जो की न्यायिक जांच नहीं कर सकती है।

5. सीबीआई की संवैधानिक वैधता क्या है ?

भारतीय संविधान के आर्टिकल 13/3/A के अनुसार कार्यकारी रेसोलुशन एक विभागीय आदेश से अधिक कुछ नहीं होता जिसपर सीबीआई का सृजन हुआ है। उक्त आदेश पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर का न होना भी सीबीआई को भारत सरकार का आदेश से न होना भी सिद्ध करता है। संविधान की आठवीं सूचि के अनुसार सीबीआई का मतलब सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इंटेलिजेंस एवं इन्वेस्टीगेशन है जिसमे आंबेडकर ने इस इन्वेस्टीगेशन को गैर न्यायिक जांच कहा था.और ये निश्चित किया था की सीबीआई क्रिमिनल प्रोसीजर कोड का प्रयोग नहीं कर सकती है।

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6. सीबीआई की कानूनी वैधता क्या है ?

चूँकि सीबीआई गैर संवैधानिक है , सीबीआई को वैधानिक मान्यता देने के लिए कोई एक्ट या अध्यादेश या उच्च सदन के दो तिहाई सांसदों की मान्यता या फिर राष्ट्रपति की संस्तुति नहीं है अतः यह निश्चित रूप से गैर क़ानूनी विभाग है जो की भारत सरकार के लिए काम करता है।

7. क्या सीबीआई का गठन परमानेंट है ?

भारत सरकार के मुख्या सचिव के आदेश में स्पष्ट लिखा हुआ है की यह रेसोलुशन एडहॉक यानी अस्थाई है इसलिए सीबीआई एक टेम्पररी विभाग है।

8. क्या सीबीआई की असंवैधानिकता को लेकर न्यायलय ने कोई आदेश दिया है ?

जी हाँ , गौहाटी उच्च न्यायलय के न्यायाधीश इक़बाल अहमद अंसारी ने एक केस की सुनवाई में जिसकी संख्या WA 119 WP (C) संख्या 6877 सं 2005 पर फैसला सुनते हुए कहा है की सीबीआई एक असंवैधानिक विभाग है, यह पुलिस नहीं है, इसको न्यायिक जांच करने का कोई अधिकार नहीं है , इसको क़ानूनी वैधता देने योग्य कोई साखस्य भारत सरकार के पास नहीं हैं, किसी भी राज्य की सहमति के बिना या उस राज्य में जांच नहीं कर सकती है, सीबीआई को कोई विशेष कैडर नहीं प्राप्त है , सीबीआई की कोई चयन प्रक्रिया नहीं है , दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट एक्ट में एक बार भी सीबीआई शब्द का जिक्र नहीं है अतः सीबीआई संवैधानिक और क़ानूनी रूप से अवैध विभाग है।

9. क्या कोइ राज्य सीबीआई को अपने यहाँ आने से रोक सकता है ?

जी हाँ , रेसोलुशन के अनुसार दिल्ली व संघ शासित प्रदेशों को छोड़कर किसी भी राज्य की सहमति के बगैर वह उस राज्य में जांच नहीं कर सकती है।

10. यदि न्यायपालिका के आदेश के बावजूद कोई राज्य जांच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सीबीआई को रोकता है तो क्या होगा ?

उच्च न्यायलय के आदेशानुसार यदि किसी राज्य ने सीबीआई को अपने राज्य में आने की सहमति वापस ले ली है , ऐसी स्थिति में सहमति वापस लेने से पहले के सभी न्यायिक आदेश मान्य होंगे और राज्य को जांच प्रक्रिया में सहयोग करना पड़ेगा अन्यथा ये कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट माना जायेगा।

11. क्या सीबीआई केंद्र सरकार के आदेश पर काम करती है ?

जी हाँ बिलकुल, गृह मंत्रालय के आदेश के बिना सीबीआई अपनी मर्जी से कोई जांच नहीं करती और न ही जांच के परिणाम को प्रकाशित करती है। न्याय पालिका का आदेश यहाँ अपवाद है।

12. सीबीआई में नियुक्त कर्मचारी व अधिकारी कहाँ से आते हैं ?

चूँकि सीबीआई की अपनी कोई चयन प्रक्रिया नहीं है अतः अधिकारीयों का चयन विभिन्न राज्यों के पुलिस बल से ही किया जाता है और सीबीआई डिरक्टर का चयन एक चयन कमीतटे करती है जिसमे प्रधान मंत्री , नेता विपक्ष और मुख्या न्यायाधीश शामिल होते हैं।

आशा करता हूँ की अब आपको समझ में आ चूका होगा की सीबीआई को तोता क्यों कहा जाता है और किस प्रकार सीबीआई का दुरुपयोग केंद्र सरकारें करती आ रही हैं।

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