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चैत्र नवरात्र: काशी पंचांग के अनुसार 6 अप्रैल से शुरू होगा हिन्दू ‘नव वर्ष’

धर्म/फेस्टिवल|

नवरात्र भारतवर्ष में हिंदूओं द्वारा मनाया जाने प्रमुख पर्व है। इस दौरान मां के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। वैसे तो एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में कुल मिलाकर चार बार नवरात्र आते हैं लेकिन चैत्र और आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक पड़ने वाले नवरात्र काफी लोकप्रिय हैं। बसंत ऋतु में होने के कारण चैत्र नवरात्र को वासंती नवरात्र तो शरद ऋतु में आने वाले आश्विन मास के नवरात्र को शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है। चैत्र और आश्विन नवरात्र में आश्विन नवरात्र को महानवरात्र कहा जाता है। इसका एक कारण यह भी है कि ये नवरात्र दशहरे से ठीक पहले पड़ते हैं दशहरे के दिन ही नवरात्र को खोला जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में मां के अलग-अलग रुपों की पूजा को शक्ति की पूजा के रुप में भी देखा जाता है।

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मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि मां के नौ अलग-अलग रुप हैं। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इसके बाद लगातार नौ दिनों तक मां की पूजा  इस साल चैत्र नवरात्र 6 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। नवमी तिथि 14 अप्रैल की है।   काशी पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल प्रतिपदा को नया साल शुरू होता है इन नौ दिनों मे मां के नौ रुपों की पूजा की जाती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना अच्छा रहता है।   इस साल 6 अप्रैल शनिवार से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त में 6 बजकर 9 मिनट से लेकर 10 बजकर 19 मिनट के बीच घट स्थापना करना बेहद शुभ होगा। 

 किस दिन होगी किस देवी की पूजा:

  • नवरात्र प्रथम –   6 अप्रैल को घट स्थापन व शैलपुत्री की पुजा
  • नवरात्र द्वितीय – 7 अप्रैल को ब्रह्मचारिणी की पुजा
  • नवरात्र तृतीय –   8 अप्रैलको  चंद्रघंटा की पुजा
  • नवरात्र चतुर्थी –   9 अप्रैल को कुष्मांडा की पुजा
  • नवरात्र पंचमी –   10 अप्रैल को स्कंदमाता की पुजा
  • नवरात्र षष्ठी –    11 अप्रैल को कात्यायनी की पुजा
  • नवरात्र सप्तमी –  12 अप्रैल को कालरात्रि की पुजा
  • नवरात्रि अष्टमी–13 अप्रैल को महागौरी की पुजा
  • नवरात्र नवमी – 14 अप्रैल को सिद्धिदात्री की पुजा

घट स्थापना मुहूर्त: 

  • इस साल 6 अप्रैल शनिवार से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त में 6 बजकर 9 मिनट से लेकर 10 बजकर 19 मिनट के बीच घट स्थापना करना बेहद शुभ होगा।

नवरात्रि में नौ दिन कैसे करें नवदुर्गा साधना:

  • माता दुर्गा के 9 रूपों का उल्लेख श्री दुर्गा-सप्तशती के कवच में है जिनकी साधना करने से भिन्न-भिन्न फल प्राप्त होते हैं। कई साधक अलग-अलग तिथियों को जिस देवी की हैं, उनकी साधना करते हैं, जैसे प्रतिपदा से नवमी तक क्रमश:-
  • माता शैलपुत्री : प्रतिपदा के दिन इनका पूजन-जप किया जाता है। मूलाधार में ध्यान कर इनके मंत्र को जपते हैं। धन-धान्य-ऐश्वर्य, सौभाग्य-आरोग्य तथा मोक्ष के देने वाली माता मानी गई हैं।
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